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संसद का मॉनसून सत्र: क्या होंगे बड़े बदलाव और विधेयक?

संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है, जिसमें कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। इस सत्र में 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक' और 'वंदे मातरम् बिल' पर चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव के चलते, विपक्ष की स्थिति कमजोर हुई है, जबकि एनडीए की स्थिति मजबूत हुई है। जानें इस सत्र में क्या-क्या हो सकता है और किस प्रकार के विधेयक पारित किए जा सकते हैं।
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संसद का नया सत्र शुरू


नई दिल्ली: संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से आरंभ होने जा रहा है, जो देश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलावों का गवाह बनेगा। अप्रैल में समाप्त हुए बजट सत्र के बाद से राजनीतिक परिदृश्य में काफी परिवर्तन आया है। चुनावी हार, आंतरिक विद्रोह और विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' में बिखराव के चलते विपक्ष कमजोर स्थिति में है, जबकि सत्ताधारी एनडीए की स्थिति मजबूत हुई है। इन नए समीकरणों के बीच, सरकार कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की योजना बना रही है, जबकि विपक्ष भी जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है।


सत्र में पेश होंगे ये 6 महत्वपूर्ण विधेयक

सरकार ने इस सत्र के लिए छह प्रमुख विधेयकों को सूचीबद्ध किया है। इनमें सबसे अधिक चर्चा 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' पर होने की संभावना है। सरकार का कहना है कि यह विधेयक विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता लाएगा, जबकि विपक्ष इसे एनजीओ की आवाज को दबाने का प्रयास मानता है। इसके अलावा, 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' (वंदे मातरम् बिल) भी चर्चा में है। इस विधेयक के तहत, राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के अपमान पर तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।


FCRA और 'वंदे मातरम् बिल' पर टकराव की संभावना

इस सत्र में सबसे बड़ा राजनीतिक टकराव 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक' पर होने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि यह विधेयक विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए आवश्यक है। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि सरकार इसके माध्यम से विदेशों से सहायता प्राप्त करने वाले एनजीओ और सामाजिक संगठनों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहती है। इसके साथ ही, सरकार 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' यानी 'वंदे मातरम् बिल' भी पेश करने जा रही है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो वंदे मातरम् का अपमान करने या इसके गायन में बाधा डालने पर दोषी को तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।


लोकसभा का गणित कैसे बदला?

टीएमसी में बड़ी विद्रोह: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) आंतरिक कलह का सामना कर रही है। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह कर दिया है। इन बागी सांसदों ने त्रिपुरा के एक गैर-मान्यता प्राप्त दल 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में विलय कर लिया है और लोकसभा में एनडीए को समर्थन देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, एनसीपीआई अब सदन में एनडीए का दूसरा सबसे बड़ा सहयोगी दल बन गया है।


कांग्रेस पर धोखाधड़ी का आरोप

तमिलनाडु में कांग्रेस-डीएमके का बिखराव: अभिनेता जोसेफ विजय की पार्टी 'टीवके' (TVK) के उभार ने तमिलनाडु की राजनीति में पुराने समीकरणों को बदल दिया है। कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़कर अपने 5 विधायकों के साथ टीवीके को समर्थन दे दिया है। इससे नाराज होकर डीएमके ने कांग्रेस पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया और 'इंडिया ब्लॉक' से नाता तोड़ लिया। इस मौके का फायदा उठाते हुए भाजपा ने डीएमके के साथ नजदीकियां बढ़ाई हैं। नतीजतन, डीएमके अब परिसीमन बिल को कुछ शर्तों के साथ समर्थन देने को तैयार हो गई है, जिसका उसने बजट सत्र में कड़ा विरोध किया था। इससे मोदी सरकार के लिए महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन बिल को पास कराने की राह आसान हो सकती है, हालांकि यह बिल फिलहाल मौजूदा सत्र की कार्यसूची में शामिल नहीं है.