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संसद के मानसून सत्र में हंगामा, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित

संसद के मानसून सत्र के पांचवे दिन हंगामे की स्थिति उत्पन्न हुई, जब विपक्ष ने NEET पेपर लीक मामले पर चर्चा की मांग की। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए, सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया। जानें इस घटनाक्रम के बारे में और क्या कहा प्रधानमंत्री मोदी ने।
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संसद में हंगामे का माहौल


नई दिल्ली. संसद के मानसून सत्र के पांचवे दिन शुक्रवार को जोरदार हंगामा हुआ। देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच, सरकार ने इस पर चर्चा करने का निर्णय लिया, लेकिन विपक्ष ने इसे लेकर सरकार को घेर लिया। NEET पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष ने सदन में तीव्र हंगामा किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।


दोपहर 12 बजे लोकसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हुई, जिसकी अध्यक्षता भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने की। विपक्ष के लगातार विरोध के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी, जिससे इसे सोमवार तक स्थगित करना पड़ा। मानसून सत्र की शुरुआत से ही दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष NEET पेपर लीक मामले पर विस्तृत चर्चा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है। लगातार पांचवे दिन भी प्रश्नकाल पूरा नहीं हो सका।





दोपहर बाद राज्यसभा में 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किया गया, जिसका उद्देश्य 'वंदे मातरम्' को कानूनी संरक्षण प्रदान करना है। लोकसभा में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही को सुचारू रखने और NEET मुद्दे पर चर्चा में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि बहस से बचने का प्रयास देश के लिए गलत संदेश देगा।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश में कहा कि सरकार NEET पेपर लीक के मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर कैबिनेट बैठक में चर्चा होगी और अगले सप्ताह संसद में एक विधेयक लाया जाएगा। कार्यसूची के अनुसार लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पर भी चर्चा और पारित कराने का प्रस्ताव था। अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की और कहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर समय पर निर्णय होना आवश्यक है, क्योंकि 'न्याय में देरी, न्याय से वंचित करना है।'


संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलेगा।