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संसद के मानसून सत्र में हंगामे का दौर जारी, विपक्ष ने किया विरोध

संसद के मानसून सत्र में हंगामे का दौर जारी है। विपक्षी दलों ने अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा में कार्यवाही बाधित हुई। वित्त मंत्री ने टैक्स संशोधन से जुड़ा बिल पेश किया, जबकि राज्यसभा में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से संबंधित बिल पारित किया गया। जानें इस घटनाक्रम के बारे में विस्तार से।
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संसद में हंगामे की स्थिति


नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का तीसरा हफ्ता भी लगातार बाधित हो रहा है। मंगलवार को सत्र के 12वें दिन, विपक्षी दलों ने अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर जोरदार हंगामा किया। संसद परिसर के बाहर भी विपक्ष ने इस मुद्दे पर नारेबाजी की, जिसके कारण दोनों सदनों में कार्यवाही ठप हो गई। इसी हंगामे के बीच, लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स संशोधन से संबंधित एक बिल पेश किया। वहीं, राज्यसभा में हंगामे के बीच जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़ा बिल ध्वनिमत से पारित किया गया।


मंगलवार को लोकसभा में कई बार स्थगन हुआ, और कुल मिलाकर सदन केवल 20 मिनट तक ही चल सका। भोजनावकाश के बाद, सदन को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। राज्यसभा की कार्यवाही भी दिन में दो बार स्थगित हुई। 11 बजे कार्यवाही शुरू होने के आधे घंटे के भीतर ही इसे स्थगित कर दिया गया। दोपहर 12 बजे कार्यवाही फिर से शुरू हुई, लेकिन यह केवल 20 मिनट तक ही चल सकी। दोपहर दो बजे जब कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तो चढ़ावे की चोरी पर जोरदार हंगामा हुआ।


इससे पहले, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संसदीय कार्य मंत्री कीरेन रिजिजू के बीच तीखी बहस हुई। खड़गे ने कहा, 'राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था। ट्रस्ट को 70 एकड़ से अधिक भूमि सौंपी गई। प्रधानमंत्री खुद राम मंदिर से जुड़े हर आयोजन में शामिल हुए हैं। अब ईडी, सीबीआई और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियां कहां हैं? सरकार को इस पर सदन में जवाब देना चाहिए।'


इस पर, संसदीय कार्य मंत्री कीरेन रिजिजू ने कहा, 'कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने राम मंदिर के निर्माण पर काली पट्टी बांधकर विरोध किया था। आज वही लोग घड़ियाली आंसू बहाकर देश को गुमराह नहीं कर सकते। पहले भगवान राम का अपमान करने के लिए देश से माफी मांगिए, फिर सरकार से जवाब मांगिए।'