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संसद के मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में बागी सांसदों का विवाद

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में बागी सांसदों की उपस्थिति पर विवाद खड़ा हो गया। विपक्ष ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए बैठक से वॉकआउट किया। टीएमसी सांसदों ने सरकार के इस कदम को संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताया। जानें इस राजनीतिक विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
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सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक विवाद

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में रविवार को एक बड़ा राजनीतिक विवाद उत्पन्न हुआ। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले 20 बागी सांसदों को बैठक में शामिल करने का विपक्ष ने कड़ा विरोध किया। इस विरोध के चलते कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी, झामुमो, वाम दल, नेशनल कॉन्फ्रेंस और शिवसेना (यूबीटी) समेत सभी विपक्षी दल बैठक से सांकेतिक वॉकआउट कर गए। हालांकि कुछ समय बाद सभी दल फिर से बैठक में लौट आए।


बागी सांसदों की उपस्थिति पर विवाद

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में उस समय माहौल गरमा गया जब हाल ही में टीएमसी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए सांसदों को भी आमंत्रित किया गया। विपक्ष का कहना है कि संसद की आधिकारिक सूची में ये सांसद अब भी टीएमसी के सदस्य हैं और उनके विलय को मान्यता नहीं मिली है। ऐसे में उन्हें अलग राजनीतिक दल के रूप में बुलाने का कोई आधार नहीं है।


टीएमसी के सवाल

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि जिस पार्टी को संसद की वेबसाइट पर मान्यता प्राप्त दल के रूप में दर्ज नहीं किया गया है, उसे सर्वदलीय बैठक में शामिल करना नियमों के खिलाफ है। उनका कहना था कि जब तक संसदीय प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक इन सांसदों को अलग पहचान नहीं दी जा सकती।


महुआ मोइत्रा का बयान

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्ष का वॉकआउट लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सम्मान में किया गया सांकेतिक विरोध था। उन्होंने कहा कि लोकसभा सचिवालय के रिकॉर्ड में टीएमसी के 28 सांसद दर्ज हैं और 20 बागी सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर अभी फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में संसदीय कार्य मंत्रालय ने उन्हें किस आधार पर अलग दल मानकर बैठक में बुलाया, यह बड़ा सवाल है। महुआ ने यह भी कहा कि 91वें संविधान संशोधन के बाद अलग संसदीय ब्लॉक बनाने की व्यवस्था नहीं है। इसलिए सरकार का यह कदम संसदीय परंपराओं के विपरीत है।


नई पार्टी का गठन

पिछले महीने टीएमसी के 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के गठन की घोषणा की थी। इसके बाद पहली बार उन्हें किसी सर्वदलीय बैठक में बुलाया गया, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।


एनसीपीआई का आभार

विवाद के बीच एनसीपीआई की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का अवसर देने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को चर्चा में शामिल होने का मौका मिला, जिसके लिए वे सरकार की धन्यवाद करती हैं। संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। ऐसे में पहले ही दिन से सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के संकेत मिल गए हैं। यह विवाद आगामी सत्र के दौरान भी राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।