Newzfatafatlogo

संसद के मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में हंगामा

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। कई विपक्षी दलों ने बागी सांसदों की मौजूदगी के खिलाफ वॉकआउट किया। कांग्रेस और सीपीएम नेताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बैठक का उद्देश्य विधायी एजेंडे पर चर्चा करना था, लेकिन विवाद ने इसे प्रभावित किया। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और विपक्ष की चिंताएं।
 | 

सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक तनाव


नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक माहौल काफी गरमाया। केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई इस बैठक से कई विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) और तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों को बैठक में शामिल करना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। इसी मुद्दे पर विरोध जताते हुए विपक्षी नेताओं ने बैठक का बहिष्कार किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने की संभावना है।


सर्वदलीय बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी मानसून सत्र के विधायी एजेंडे पर चर्चा करना और सभी दलों से सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील करना था। लेकिन बैठक की शुरुआत से पहले ही बागी सांसदों की मौजूदगी को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। विपक्षी नेताओं ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई और बैठक छोड़कर बाहर निकल गए।




कांग्रेस और सीपीएम नेताओं की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी का बयान


कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष के उस फैसले के विरोध में वॉकआउट किया, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) और तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों को मान्यता देने से जुड़े कदम उठाए गए हैं। वहीं, सीपीएम नेता जॉन ब्रिटास ने कहा कि बागी सांसदों को सर्वदलीय बैठक में बुलाना न्याय और संसदीय परंपराओं का उपहास है।


हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दी थी। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस के कुछ बागी सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था भी स्वीकृत की गई है। इन फैसलों के बाद विपक्षी दल लगातार विरोध जता रहे हैं.


विपक्षी सांसदों की चिंताएं

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत का बयान


शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत पार्टी छोड़ने वाले सांसदों को इस प्रकार मान्यता दी जा सके। उन्होंने मांग की कि बागी सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। वहीं, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि जब पार्टी की संख्या में कोई आधिकारिक बदलाव नहीं हुआ है तो बागी सांसदों को किस आधार पर सर्वदलीय बैठक में बुलाया गया।


आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एन. डी. गुप्ता का बयान


आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एन. डी. गुप्ता ने भी अपनी पार्टी के कुछ सांसदों से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी याचिका पर अभी तक निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने बागी सांसदों को अलग बैठने की व्यवस्था देने का विरोध किया और इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत बताया।