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संसद में एंटी पेपर लीक बिल पर गरमागरम बहस

संसद के मानसून सत्र में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की निंदा की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदर्शनकारी आतंकवादी थे। अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को बचाने के लिए प्रधान को हटाया गया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। जानें इस गरमागरम बहस के सभी पहलू।
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मानसून सत्र में पेपर लीक पर चर्चा

प्रियंका गांधी ने संसद के मानसून सत्र के दौरान एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान सरकार की आलोचना की। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग करने की निंदा की। प्रियंका ने कहा कि प्रदर्शनकारी आतंकवादी नहीं थे और उन पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया, यह सवाल उठाया। उनके बयान के बाद सदन में सत्तापक्ष ने हंगामा किया।


अखिलेश यादव का सरकार पर हमला

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने चर्चा के दौरान सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को बचाने के लिए प्रधान को हटाया गया। उन्होंने कहा कि जो लोग चढ़ावा नहीं दे सके, वे पेपर लीक से कैसे बच सकते हैं। जब केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने इमरजेंसी का जिक्र किया, तो अखिलेश ने कहा कि तब भी बदलाव हुआ था और अब भी होगा। उन्होंने शिक्षा और रोजगार पर हो रहे हमलों की बात की। इस पर बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि एंटी पेपर लीक बिल मोदी सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है।


गौरव गोगोई का आरोप

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर आरोप लगाया कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या को लेकर उनकी नीयत स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि नया संशोधन विधेयक केवल दिखावा है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि यह विधेयक छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


जितेंद्र सिंह का समर्थन

जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह संशोधन 2024 में लाए गए पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट को मजबूत करेगा। उन्होंने बताया कि पेपर लीक की समस्या केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर में फैली हुई है।


कांग्रेस का सवाल

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह विधेयक छात्रों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है, लेकिन चर्चा के समय न तो प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री सदन में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण विषय पर सरकार के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति आवश्यक थी।