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संसद में राजनीतिक गतिरोध: राहुल गांधी ने सहयोग की शर्तें रखीं

संसद के मानसून सत्र में राजनीतिक गतिरोध जारी है, जहां सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनाने की कोशिशें सफल नहीं हो रही हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से मुलाकात की, जिसमें सहयोग मांगा गया, लेकिन राहुल ने शर्तें रखीं। उन्होंने कहा कि जब तक विपक्ष की प्रमुख मांगों पर चर्चा नहीं होगी, तब तक सहयोग संभव नहीं है। इस बीच, संसद में हंगामे का असर विधायी कार्यों पर पड़ रहा है। जानें इस राजनीतिक स्थिति के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
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नई दिल्ली में राजनीतिक टकराव


नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच सहमति की कोशिशें फिलहाल सफल नहीं हो रही हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की, जिसमें परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर सहयोग मांगा गया। हालांकि, राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि जब तक विपक्ष की प्रमुख मांगों पर चर्चा नहीं होगी, तब तक किसी विधायी कार्य में सहयोग नहीं किया जाएगा।


सरकार का सहयोग मांगना, राहुल की शर्तें

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से उनके कक्ष में मुलाकात की। इस दौरान, सरकार ने कांग्रेस से परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए समर्थन मांगा। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष की प्राथमिकता उन मुद्दों पर चर्चा कराना है, जिन्हें वे जनहित से संबंधित मानते हैं। उन्होंने राम मंदिर चंदा गड़बड़ी और 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग की।


संसद का कामकाज प्रभावित

संसद में लगातार हो रहे हंगामे का असर विधायी कार्यों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। मानसून सत्र की शुरुआत के बाद से लोकसभा में प्रश्नकाल नियमित रूप से नहीं चल पाया है। विपक्ष लगातार नारेबाजी और प्रदर्शन के जरिए सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि सदन को सुचारु रूप से चलाना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी से मुलाकात के बाद किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और गृह मंत्री अमित शाह से मौजूदा स्थिति पर चर्चा की।


परिसीमन विधेयक पर राजनीतिक चुनौती

सरकार इस सत्र में परिसीमन विधेयक को आगे बढ़ाने की इच्छुक है, लेकिन विपक्ष के कड़े रुख से उसकी राह आसान नहीं दिख रही है। विपक्ष का कहना है कि पहले उनके उठाए गए मुद्दों पर सदन में विस्तृत चर्चा कराई जाए, उसके बाद ही अन्य विधेयकों पर विचार संभव होगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन में व्यवधान पर चिंता जताते हुए कहा कि लगातार नारेबाजी और तख्तियां दिखाने से संसद की गरिमा प्रभावित होती है। ऐसे हालात में सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनने का इंतजार बना हुआ है।