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संसद में विपक्ष का हंगामा, नीट पेपर लीक पर चर्चा की मांग

संसद के मानसून सत्र के तीसरे दिन, विपक्ष ने नीट पेपर लीक और छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया। हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित कर दी गई। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की, जबकि सरकार ने चर्चा के लिए तैयार होने का दावा किया। जानें इस मुद्दे पर और क्या हुआ।
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संसद का मानसून सत्र: विपक्ष का प्रदर्शन


नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के तीसरे दिन, बुधवार को कोई कार्यवाही नहीं हो पाई। विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे और परिसर में प्रदर्शन किया। जैसे ही दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों ने नीट यूजी परीक्षा लीक और छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ नारेबाजी की और इस पर चर्चा की मांग की। हंगामे के कारण कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया। कई बार स्थगन के बाद, दोनों सदन पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिए गए।


राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष तब तक चर्चा नहीं करेगा जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते। वहीं, लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री कीरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार पिछले तीन दिनों से नीट पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है और उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से भी मुलाकात की।


बुधवार को राहुल गांधी सहित अधिकांश विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे। विपक्षी दलों ने नीट विवाद और छात्रों पर लाठीचार्ज के मामले में राज्यसभा में नियम 267 के तहत चर्चा की मांग की, लेकिन सभापति ने इसे खारिज कर दिया। राजनाथ सिंह ने कहा, 'दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन गंभीर चिंता का विषय हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग छात्रों और युवाओं को अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।'


लोकसभा में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यह केवल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी या भाजपा का मुद्दा नहीं है, बल्कि छात्रों और युवाओं का मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ मारपीट की गई, जिसके विरोध में विपक्ष को प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करना पड़ा। अखिलेश ने कहा कि जब प्रधानमंत्री सदन के बाहर बयान दे सकते हैं, तो इस मुद्दे पर संसद में आकर जवाब क्यों नहीं देते।