संसद में विवादित विधेयकों की स्थिति: क्या होगा मानसून सत्र में?
संसद में विधेयकों की चर्चा
पिछले कुछ दिनों से यह प्रतीत हो रहा था कि भाजपा संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत प्राप्त करने के लिए सक्रिय है और मानसून सत्र में कई विवादित विधेयकों को पास कराने की योजना बना रही है। संविधान के 129वें, 130वें और 131वें संशोधन विधेयकों पर चर्चा चल रही थी। हालांकि, यह बताया गया कि 129वां संशोधन विधेयक, जो पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने से संबंधित है, संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट के अभाव में पेश नहीं किया जाएगा। लेकिन 130वां संशोधन विधेयक लाने की योजना थी, जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिन तक जेल में रहने पर उनके पद से हटने का प्रावधान है। इस पर संयुक्त संसदीय समिति ने विचार किया और कुछ बदलाव किए हैं।
सत्र के आरंभ में संयुक्त संसदीय समिति की बैठक होनी थी, लेकिन यह बैठक टल गई है। इसी तरह, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक को भी इस सत्र में पास कराने की योजना थी, जिसके लिए 20 जुलाई को संसदीय समिति की बैठक निर्धारित की गई थी। लेकिन यह बैठक भी स्थगित कर दी गई है। इन दोनों विवादित विधेयकों पर चर्चा अभी टल गई है। हालांकि, यह निश्चित नहीं है कि सरकार इस सत्र में इन विधेयकों को पेश नहीं करेगी। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार पहले 131वें संशोधन विधेयक पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है।
संविधान का 131वां संशोधन विधेयक नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन से संबंधित है, जिसमें महिला आरक्षण लागू करने के लिए जनगणना की शर्त को समाप्त करने का प्रावधान है। सरकार का उद्देश्य पुरानी जनगणना के आधार पर परिसीमन करके सीटों की संख्या बढ़ाना है, जिसमें से दो तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। विपक्ष इस परिसीमन का विरोध कर रहा है। जानकार सूत्रों के अनुसार, सरकार को इस विधेयक पर विभिन्न पार्टियों का समर्थन प्राप्त है, जिससे वह इसे पास कराने के लिए आश्वस्त है। लेकिन पहले वह शिक्षा विधेयक या पीएम, सीएम और मंत्रियों को हटाने वाले विधेयक को लाकर विवाद नहीं बढ़ाना चाहती।
