सऊदी अरब की मुश्किलें: अमेरिका ने किया धोखा, हूतियों से की गुप्त डील
सऊदी अरब की स्थिति और अमेरिका का विश्वासघात
सऊदी अरब ने जिस अमेरिका पर भरोसा किया, उसी ने उसके सबसे बड़े दुश्मन अंसारुल्लाह के साथ गुप्त समझौता कर लिया है। ओमान में हुई एक सीक्रेट मीटिंग के बाद अमेरिका ने सऊदी अरब को जंग के मैदान में अकेला छोड़ दिया है। सऊदी अरब अब अमेरिका पर भरोसा करने की सभी सीमाएं पार कर चुका है। इसराइल के एनल्फ चैनल और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, रियाद के शाही गलियारों में यह चर्चा हो रही है कि अमेरिका के निर्णय न लेने की कीमत सऊदी अरब को चुकानी पड़ रही है। यमनी सूत्रों के अनुसार, हाल ही में मस्कट में अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच एक गोपनीय बैठक हुई।
हूती प्रतिनिधियों की शर्तें और सऊदी अरब की स्थिति
बैठक में हूती प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख नेता मोहम्मद अब्दुल सलाम और अब्दुल मलिक अल अजरी शामिल थे। इस मीटिंग में अंसारुल्ला ने अमेरिकी अधिकारियों को आश्वासन दिया कि वे अमेरिकी या अन्य वाणिज्यिक जहाजों पर हमला नहीं करेंगे और मई 2025 में हुए सीज फायर समझौते का पालन करेंगे। हालांकि, उन्होंने एक कड़ी शर्त रखी, जिससे अमेरिका फंस गया और सऊदी अरब अकेला पड़ गया। हूतियों ने मांग की कि अमेरिका सऊदी अरब के खिलाफ उनकी लड़ाई से पूरी तरह दूर रहेगा। यह स्थिति तब आई है जब अमेरिका ने सऊदी अरब के लिए समर्थन की कसमें खाई थीं।
सऊदी अरब की रक्षा स्थिति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इजरायली नेटवर्क एंटल के अनुसार, सऊदी शाही परिवार के करीबी सूत्रों ने बताया कि रियाद इस समय बेहद कमजोर महसूस कर रहा है। हूतियों के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब के महंगे पेट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों के भंडार को खाली कर दिया है। सऊदी रक्षा विभाग ने अमेरिका से अतिरिक्त सैन्य सहायता और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मांग की, लेकिन वाशिंगटन ने मदद करने से इनकार कर दिया। एक सूत्र ने गुस्से में कहा कि जब तक अमेरिका कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक सऊदी अरब को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्की से भी मदद मांगी, लेकिन दोनों देशों ने केवल हथियारों के सौदों में रुचि दिखाई।
सऊदी अरब की बढ़ती चुनौतियाँ
सऊदी अरब की समस्याएँ यहीं खत्म नहीं होतीं। हूतियों ने यमन के अलहाजम और अमारी क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। तनाव इस कदर बढ़ गया है कि मक्का शहर के पास एयर रेड सायरन बजाए गए हैं। यह स्थिति सऊदी अरब के लिए एक नई चुनौती बन गई है।
