सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों में तेजी, पाकिस्तान की सेना की एंट्री से स्थिति और बिगड़ी
सऊदी अरब पर बढ़ते हमले
यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में, सऊदी ने ओमान के एक आतंकवादी पायलट को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन यूएई ने उसकी सभी कोशिशों को विफल कर दिया। सऊदी अरब कट्टरपंथियों का समर्थन कर रहा है, जबकि वही जिहादी उसे गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह चिंताजनक है कि विद्रोही अल्लाह के घर, मदीना, को भी नहीं छोड़ रहे हैं। हाल ही में, हूतियों ने मदीना पर एक बड़ा हमला किया, जिससे भारी नुकसान हुआ। सऊदी अरब इस स्थिति से निपटने के लिए प्रयासरत है, लेकिन अब पाकिस्तान ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। मक्का समझौते के बावजूद, पाकिस्तान ने अपनी सेना सऊदी अरब भेजने का निर्णय लिया है।
हूती विद्रोहियों का जवाबी हमला
पाकिस्तान की सेना की एंट्री के बाद, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर भीषण हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, हूतियों ने सऊदी अरब के तीन एयरपोर्टों को निशाना बनाया है, जहां ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं। यह हमला इतना भयानक था कि कई लोग मारे गए। सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग के बावजूद, हूतियों ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। उनके पास यमन से ड्रोन और मिसाइल हमले करने की क्षमता है, और वे इस संघर्ष को गंभीरता से ले रहे हैं।
यमन में हूतियों का प्रभाव
हूतियों का नियंत्रण यमन के लगभग एक तिहाई क्षेत्र पर है, जहां देश की 80% जनसंख्या निवास करती है। हाल के दिनों में, उन्होंने यमन के पश्चिमी तट पर कई रणनीतिक पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया है। यदि वे सरकारी क्षेत्रों को काटने में सफल होते हैं, तो सरकार पूरी तरह से नियंत्रण खो सकती है। यमन में सरकार और हूतियों के बीच पिछले 12 वर्षों से संघर्ष चल रहा है। सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है। पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान हूतियों को हथियार, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
पाकिस्तान की स्थिति
हूतियों ने सऊदी अरब पर हमले बढ़ाते हुए पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि यदि वह सामने आया, तो उसे भी नहीं छोड़ा जाएगा। अब पाकिस्तान को यह निर्णय लेना है कि उसे अपनी सेना वापस बुलानी है या फिर इस संघर्ष में बने रहना है।
