सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए मतदाता सूची की अनिवार्यता
मतदाता सूची से नाम कटने का प्रभाव
हाल के दिनों में जो चिंताएं व्यक्त की जा रही थीं, वे अब सच होती नजर आ रही हैं। पहले यह माना जा रहा था कि यह केवल अफवाह है कि यदि किसी का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया तो उसे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। लेकिन अब यह स्पष्ट हो रहा है कि सरकार इस दिशा में कदम बढ़ा रही है। यदि किसी का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है, तो वह लाभार्थियों की सूची से भी बाहर हो जाएगा। इसका मतलब है कि केवल वही लोग जो भारत के मतदाता हैं, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। पहले किसी भी लाभकारी योजना को मतदाता सूची से नहीं जोड़ा गया था। अब तक आधार के माध्यम से लोगों को लाभकारी योजनाओं से जोड़ा जाता था। प्रधानमंत्री ने इस प्रक्रिया को जैम यानी जनधन खाता, आधार और मोबाइल के माध्यम से सफल बताया है। उन्होंने कहा कि जैम क्रांति के जरिए करोड़ों लोगों को सीधे लाभ मिल रहा है।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने हाल ही में कहा है कि अब आधार के माध्यम से लाभकारी योजनाओं से जुड़ने का समय समाप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि अब मतदाता पहचान पत्र के नंबर यानी इपिक नंबर और बायोमेट्रिक डेटा के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। हालांकि, ललन सिंह न तो प्रधानमंत्री कार्यालय के मंत्री हैं, न वित्त मंत्री, न कृषि मंत्री, न आवास मंत्री और न ही सामाजिक कल्याण मंत्रालय के मंत्री। वे पशुपालन विभाग के मंत्री हैं, लेकिन उनके बयान का महत्व है। उनके इस बयान का मतलब है कि सरकार इस दिशा में तैयारी कर रही है।
चुनाव आयोग ने 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम हटाए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में वयस्क जनसंख्या लगभग एक सौ करोड़ है, जबकि मतदाता संख्या 90 करोड़ के आसपास है। इसका अर्थ है कि लगभग 10 करोड़ लोग लाभकारी योजनाओं के लिए अयोग्य हो जाएंगे। इनमें से अधिकांश लोग लाभ लेने के लिए आवश्यक मानकों को पूरा करते होंगे, लेकिन यदि उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो उन्हें यह लाभ नहीं मिलेगा।
