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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: जज बनने के लिए अब केवल 1 साल का वकालत अनुभव आवश्यक

सुप्रीम कोर्ट ने जज बनने के लिए वकालत के अनुभव की अनिवार्यता को घटाकर 1 साल कर दिया है, जिससे लाखों लॉ ग्रेजुएट्स को राहत मिली है। नए नियम के अनुसार, 25 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच बिना अनुभव वाले उम्मीदवार भी परीक्षा दे सकेंगे, लेकिन उन्हें पहले एक साल के लिए ट्रेनी ज्यूडिशियल ऑफिसर के रूप में काम करना होगा। यह निर्णय युवा वकीलों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। जानें इस फैसले के सभी पहलुओं के बारे में।
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सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

नई दिल्ली: देशभर में निचली अदालतों में जज बनने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं और लॉ ग्रेजुएट्स के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक महत्वपूर्ण और राहत भरी सूचना आई है। सर्वोच्च न्यायालय ने एंट्री-लेवल न्यायिक सेवा परीक्षा के नियमों में संशोधन करते हुए एक बड़ा बदलाव किया है। कोर्ट ने परीक्षा में शामिल होने के लिए वकालत के अनुभव की आवश्यकता को काफी कम कर दिया है, जिससे न्यायिक सेवाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है।


अनुभव की अवधि में कमी

3 साल की जगह अब सिर्फ 1 साल का अनुभव हुआ जरूरी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ए.जी. मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए 2-1 के बहुमत से यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। नए आदेश के अनुसार, अब न्यायिक परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवारों को तीन साल के बजाय केवल एक साल का वकालत का अनुभव होना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने यह माना कि मई 2025 में लागू किए गए तीन साल के नियम ने नए लॉ ग्रेजुएट्स और युवा वकीलों के लिए कठिनाइयाँ पैदा कर दी थीं, इसलिए यह राहत दी गई है।


विशेष छूट का ऐलान

बिना अनुभव वाले भी दे सकेंगे परीक्षा, लेकिन रहेगी यह खास शर्त
सुप्रीम कोर्ट ने युवाओं की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए एक विशेष छूट की घोषणा की है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, 25 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाले न्यायिक परीक्षाओं के नोटिफिकेशन के लिए अनुभव की कोई अनिवार्यता नहीं होगी। इसका मतलब है कि इस अवधि में बिना वकालत के अनुभव वाले उम्मीदवार भी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। हालांकि, अदालत ने यह शर्त रखी है कि इस छूट के तहत चुने गए उम्मीदवारों को सीधे जज नहीं बनाया जाएगा। उन्हें पहले एक साल के लिए ट्रेनी ज्यूडिशियल ऑफिसर के रूप में काम करना होगा और एक साल की कड़ी स्ट्रक्चर्ड क्लर्कशिप से गुजरना होगा।


भविष्य की परीक्षाओं के लिए नियम

1 अप्रैल 2027 से पूरी तरह से लागू हो जाएगा नया नियम
सर्वोच्च न्यायालय ने भविष्य की परीक्षाओं के संदर्भ में स्थिति स्पष्ट कर दी है। अदालत के अनुसार, 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद जारी होने वाली सभी न्यायिक परीक्षाओं के नोटिफिकेशन पर एक साल के अनुभव वाला यह नया नियम पूरी तरह से लागू होगा। उल्लेखनीय है कि मई 2025 में कोर्ट ने फ्रेश लॉ ग्रेजुएट्स के सीधे जज बनने पर रोक लगाते हुए तीन साल की प्रैक्टिस को अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद इस फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिन पर अब सुनवाई करते हुए कोर्ट ने युवाओं के हक में यह बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।