सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बिना बीमा वाले वाहनों को नहीं मिलेगा ईंधन
सुप्रीम कोर्ट का सुझाव
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बिना बीमा वाले वाहनों के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। अदालत ने कहा है कि भविष्य में ऐसे वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाना चाहिए, जिनके पास वैध मोटर इंश्योरेंस नहीं है। इस कदम से वाहन मालिकों को समय पर बीमा कराने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा और सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा मिलने में आने वाली समस्याएं भी कम होंगी।
वाहनों का बीमा न होने की स्थिति
देश में कितने प्रतिशत वाहनों के पास इंश्योरेंस नहीं
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सुनवाई के दौरान बताया कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं, जिससे मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में पंजीकृत लगभग 30.4 करोड़ वाहनों में से करीब 16.5 करोड़ वाहनों का बीमा नहीं है। सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े लगभग 22 प्रतिशत मामलों में ऐसे वाहन शामिल होते हैं।
बिना बीमा वाले वाहनों को ईंधन नहीं
बिना इंश्योरेंस वालों की नहीं मिलेगा पेट्रोल
पीठ ने निर्देश दिया कि इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय मिलकर एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करें। इसके तहत वाहन के वैध बीमा को पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति से जोड़ा जा सकता है। यदि किसी वाहन का बीमा वैध नहीं होगा, तो उसे ईंधन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।
वाहनों की पहचान कैसे होगी
कैसे होगी वाहनों की पहचान
अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि हाईवे और प्रमुख सड़कों पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों को VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के डेटाबेस से जोड़ा जाए। इससे बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान कर उन्हें ई-चालान जारी किए जा सकेंगे। इसके साथ ही ट्रैफिक पुलिस को ऐसे डिजिटल उपकरण या मोबाइल ऐप उपलब्ध कराने की भी बात कही गई, जिनकी मदद से मौके पर ही वाहन के बीमा की स्थिति की जांच की जा सके।
चालान की राशि
कितना होगा चालान
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के वाहन चलाना कानून का उल्लंघन है। पहली बार पकड़े जाने पर तीन महीने तक की जेल, 2,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। दोबारा उल्लंघन करने पर जुर्माना बढ़कर 4,000 रुपये तक हो सकता है।
इसके अलावा, अदालत ने 2018 के अपने आदेश में संशोधन करते हुए नई गाड़ियों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अनिवार्य अवधि बढ़ा दी है। अब नई कार खरीदने पर चार साल और नए दोपहिया वाहन खरीदने पर छह साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना अनिवार्य होगा। कोर्ट का मानना है कि इससे बीमा कवरेज बढ़ेगा और सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिलने में मदद मिलेगी।
