सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए में सुधार के लिए उठाए कदम
सुप्रीम कोर्ट का एनटीए में सुधार का आदेश
नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली नीट यूजी और नीट पीजी समेत अन्य अखिल भारतीय परीक्षाओं के संचालन में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि एनटीए को अपनी सुधार योजनाओं का पूरा विवरण अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराना होगा। इसके अलावा, यदि आवश्यक हुआ, तो जज एनटीए के कार्यालय का दौरा कर सकते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परीक्षा की प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे की बेंच ने शुक्रवार को यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिका में एनटीए को भंग करने और पेपर लीक रोकने के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत में कहा था कि नीट परीक्षा प्रणाली सुरक्षित है, लेकिन पिछले तीन वर्षों में दो बार पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। 2024 में कई केंद्रों पर पुनः परीक्षा आयोजित की गई और 2026 में पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को अपने सुधारों और प्रगति का ब्योरा वेबसाइट पर डालने का आदेश दिया है, जिससे परीक्षा प्रणाली में हो रहे परिवर्तनों की जानकारी जनता तक पहुंचे। सुनवाई के दौरान एनटीए के लिए स्थायी कर्मचारियों और विशेषज्ञों की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। अदालत ने बेहतर मानव संसाधन, प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे और संस्थानों के बीच समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित किया।
एनटीए को कानूनी आधार मजबूत करने के लिए वैधानिक व्यवस्था पर भी विचार किया गया। अदालत ने कहा कि लिखित परीक्षा से डिजिटल परीक्षा में बदलाव धीरे-धीरे किया जाना चाहिए, ताकि नई प्रणाली में कोई कठिनाई न हो। सुनवाई के दौरान केंद्र ने बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में उच्च अधिकारियों की एक पैनल की पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने फिर से कहा कि नीट परीक्षा के लिए एनटीए को यूपीएससी जैसा मजबूत तंत्र विकसित करना चाहिए, ताकि परीक्षा का अनुभव अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद भी बना रहे।
