Newzfatafatlogo

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र को नोटिस जारी करने पर जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र को 5 लाख रुपये का नोटिस जारी करने पर नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने सवाल उठाया कि जब अदालत ने पहले ही छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी, तब यह नोटिस कैसे जारी किया गया। वकील विश्वजीत भट्टाचार्य ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि इससे छात्रों में डर का माहौल बन सकता है। छात्र अक्षत त्रिपाठी ने आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में भाग लिया।
 | 

दिल्ली में प्रदर्शन से जुड़ा मामला


नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से संबंधित मामले में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के एक छात्र को 5 लाख रुपये का निजी मुचलका भरने का नोटिस मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पीठ ने यह सवाल उठाया कि जब अदालत पहले ही छात्रों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा चुकी थी, तब कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने ऐसा नोटिस कैसे जारी किया।


छात्र का मामला

यह मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के दूसरे वर्ष के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। ग्रेटर नोएडा के तृतीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट कार्यालय ने छात्र को शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र भरने का नोटिस जारी किया था, जिसमें 5 लाख रुपये का निजी मुचलका भरने की बात कही गई थी। पुलिस ने आरोप लगाया कि छात्र ने अन्य विद्यार्थियों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया था।


वकील का बयान

वकील विश्वजीत भट्टाचार्य ने उठाया मुद्दा 


सुप्रीम कोर्ट में वकील विश्वजीत भट्टाचार्य ने इस नोटिस का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि छात्र को अदालत के 1 सितंबर के आदेश के बावजूद नोटिस जारी किया गया। वकील ने यह भी कहा कि इस तरह की कार्रवाई से छात्रों में डर का माहौल बन सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि नोटिस बाद में वापस लिए जाने की खबर आई है।


CJI का बयान

CJI ने क्या कहा?


CJI सूर्य कांत ने कहा कि अदालत इस मामले में मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगेगी। उन्होंने वकील से संबंधित तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा और कहा कि मजिस्ट्रेट को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।


छात्र का पक्ष

छात्र अक्षत त्रिपाठी ने क्या कहा?


छात्र अक्षत त्रिपाठी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से भाग लिया और उस समय वह विश्वविद्यालय की कक्षाओं में नहीं जा रहे थे।


शांति बंधपत्र का नोटिस किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने या सजा देने का आदेश नहीं होता। यह आमतौर पर एक एहतियाती कानूनी प्रक्रिया होती है, जिसके माध्यम से प्रशासन किसी व्यक्ति से भविष्य में शांति बनाए रखने का आश्वासन लेने का प्रयास करता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश को देखते हुए नोटिस जारी करने पर अदालत ने गंभीर सवाल उठाए हैं।