सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों की स्वतंत्र जांच का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्देश
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में छात्रों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जो भी निर्दोष लोगों पर अत्याचार करेगा, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस प्रकार की घटनाओं के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है।
जांच की आवश्यकता पर जोर
सुनवाई के दौरान, CJI ने कहा कि इस मामले की गहन जांच होनी चाहिए और इसमें कोई संदेह नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच की प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, और इसकी संरचना की घोषणा बाद में की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश भर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.
— News Media (@AHindinews) July 28, 2026
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा है. देश भर में सार्वजनिक प्रदर्शनों और विरोध-प्रदर्शनों पर पुलिस… pic.twitter.com/bgNYFSNB9z
बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों की रिहाई
इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि NEET पेपर लीक के आरोपों के चलते कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार छात्रों को, यदि उनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, तो तुरंत रिहा किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पर केवल विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में आरोप लगाए गए हैं, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की प्रगति
यह जानकारी दी गई है कि 'संसद मार्च' के दौरान 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि गलती करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों के लिए पूरे देश में एक समान गाइडलाइंस बनाई जाएं।
सुप्रीम कोर्ट का यह बयान उन सभी मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव होता है। कोर्ट का जोर निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा देने पर है।
