सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का पक्ष: मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर उठे सवालों का जवाब
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया अपना पक्ष
भारतीय चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यों को लेकर दायर याचिका का जवाब सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया है। आयोग ने अपने हलफनामे में कहा है कि याचिका की नींव एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है और इसमें उठाए गए मुद्दों को तथ्यों के आधार पर देखना आवश्यक है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण आदेश मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से जारी किए गए थे।
निर्णय प्रक्रिया में सभी आयुक्तों की सहमति
आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेते हैं। हलफनामे के अनुसार, सभी निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सामूहिक मंजूरी से लिए जाते हैं।
आयोग ने बताया कि किसी प्रस्ताव पर निर्णय लेने से पहले संबंधित अधिकारियों और चुनाव आयुक्तों के विचारों और सुझावों पर ध्यान दिया जाता है। इसके बाद, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लिया जाता है। फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त के पास, फिर दूसरे के पास और अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त के पास भेजी जाती है।
आंतरिक कार्य-विभाजन पर स्पष्टीकरण
हलफनामे में जुलाई 2026 में आयोग के आंतरिक कार्यों के बंटवारे से संबंधित घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है। आयोग के अनुसार, 28 जुलाई को एक अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी ने कार्य-विभाजन से संबंधित आदेश जारी किया था।
इसके अगले दिन, दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस आदेश पर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा। आयोग का कहना है कि 30 जुलाई को संयुक्त निर्देश जारी होने के बाद 28 जुलाई का आदेश लागू नहीं हुआ।
फॉर्म-6 में संशोधन का स्पष्टीकरण
आयोग ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में किसी भी संशोधन की बात से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, इस फॉर्म में बदलाव का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।
आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र के प्रदर्शित होने के तरीके से बदलाव का भ्रम उत्पन्न हो सकता था।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया
आयोग ने कहा कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के आदेश के बिना किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं जोड़ा जा सकता है। जिन लोगों का विवरण पुरानी सूची से मेल नहीं खाता, उनके मामलों में जांच और स्पष्टीकरण का अवसर दिया जाएगा।
आयोग ने यह भी बताया कि मतदाता सूची से संबंधित नियमों के पालन की जांच के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाई गई है।
गोवा के 97 मतदाताओं के मामलों की जानकारी
हलफनामे में गोवा के 97 मतदाताओं के मामलों का भी उल्लेख है, जिनके नाम सूची से हटने की बात सामने आई थी। आयोग के अनुसार, इनमें से अधिकांश पहले से ही मतदाता सूची में दर्ज थे।
आयोग ने यह भी कहा कि उसने अपनी कोई आंतरिक फाइल या नोट मीडिया को जारी नहीं किया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया पर आयोग का तर्क
आयोग ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है। इसी आधार पर आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त को काम से रोकने की याचिका की सुनवाई योग्य होने पर सवाल उठाए हैं।
इस बीच, महाराष्ट्र में एसआईआर को चुनौती देने वाली एक अलग याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है।
