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सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के निर्णयों पर सुनवाई की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निर्णयों पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को अवैध ठहराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया है कि आयोग के निर्णयों में मनमानी हो रही है, जिससे संवैधानिक मुद्दे उत्पन्न हो रहे हैं। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की तिथि।
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चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को अवैध ठहराने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सहमति दे दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह करने का निर्णय लिया है। यह याचिका मंगलवार को प्रस्तुत की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग के मनमाने निर्णयों से संवैधानिक मुद्दे उत्पन्न हो रहे हैं। याचिका में देशभर में हुए एसआईआर को अवैध घोषित करने की मांग की गई है।


हाल ही में 'इंडियन एक्सप्रेस' द्वारा प्रकाशित एक खोजी रिपोर्ट में बताया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने निर्णयों में मनमानी कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि अन्य दो चुनाव आयुक्त, एसएस संधू और विवेक जोशी, ने पिछले 10 महीनों में आयोग के निर्णयों पर 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इस रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद आयोग की एक बैठक हुई, जिसमें कई सुधारों पर चर्चा की गई।


अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह के वकील विकास सिंह ने मंगलवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया और त्वरित सुनवाई की मांग की। विकास सिंह ने कहा कि बहुसदस्यीय आयोग का अर्थ है कि निर्णय या तो आम सहमति से या बहुमत से होना चाहिए।


उन्होंने यह भी कहा कि यदि एसआईआर का निर्णय बहुमत या एकमत से नहीं हुआ है, तो इसे आयोग का निर्णय कैसे माना जा सकता है। इसे गंभीर संवैधानिक संकट के रूप में देखते हुए उन्होंने त्वरित सुनवाई की अपील की, जिस पर चीफ जस्टिस ने इसे अगले सप्ताह के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।