सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति का मामला
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
पटना। बिहार की सम्राट सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की पुनर्नियुक्ति को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस संदर्भ में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें उनकी नियुक्ति को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह का कहना है कि दीपक प्रकाश न तो बिहार विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के। इसके बावजूद उन्हें दोबारा मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है, जो संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है।
याचिका में क्या कहा गया?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में यह कहा गया है कि संविधान के अनुसार किसी भी व्यक्ति को मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन उसे निर्धारित समय के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन करते हुए दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री पद दिया गया है, जिससे संवैधानिक प्रश्न उत्पन्न होते हैं। याचिका में अदालत से उनकी मंत्री पद पर नियुक्ति की वैधता की जांच करने और उचित आदेश जारी करने की मांग की गई है।
एनडीए ने दीपक प्रकाश को एमएलसी उम्मीदवार नहीं बनाया
बिहार में एमएलसी चुनाव के लिए एनडीए ने 9 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का नाम शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि एनडीए की ओर से दीपक प्रकाश को एमएलसी उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। दीपक प्रकाश ने भी स्पष्ट किया है कि वह एमएलसी के लिए नामांकन नहीं करेंगे। ऐसे में उनकी मंत्री पद की स्थिति पर संकट आ सकता है। इस मामले के सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने के बाद बिहार की राजनीतिक हलचलों में तेजी आई है। विपक्षी दल पहले भी गैर-विधायक मंत्री बनाए जाने के मुद्दे पर सवाल उठाते रहे हैं।
