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सुप्रीम कोर्ट में विपक्ष के नेताओं का मार्च, राहुल गांधी को नोटिस जारी

राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया, जिससे अदालत में नाराजगी फैल गई। अदालत ने सभी नेताओं को नोटिस जारी किया और कहा कि कोई भी अदालत को डराने की कोशिश नहीं कर सकता। चीफ जस्टिस ने इस मामले में तीखी टिप्पणी की और याचिकाकर्ताओं के आचरण पर सवाल उठाए। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और अदालत की प्रतिक्रिया।
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सुप्रीम कोर्ट में विपक्ष का प्रदर्शन


नई दिल्ली में, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया, जिससे अदालत में नाराजगी फैल गई। इस पर अदालत ने सभी नेताओं को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस मामले में तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कोई भी अदालत को डराने या दबाव में लाने की कोशिश नहीं कर सकता, और ऐसी कोशिशें बेकार हैं।


चीफ जस्टिस ने आगे कहा, 'हमें पता है कि कोर्ट के बाहर क्या हो रहा है और कोर्ट के अंदर क्या कहा जा रहा है। हम किसी काल्पनिक दुनिया में नहीं हैं। हमें हर बात की जानकारी है।' उन्होंने किसी विशेष नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन जब उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर सवाल उठाएंगे, तो यह स्पष्ट था कि उनका इशारा राहुल गांधी की ओर था।


सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं और उनके समर्थकों के अदालत परिसर में जुटने से संबंधित मामले में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य 14 नेताओं को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही, इन नेताओं की याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा गया है।


यह ध्यान देने योग्य है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले विपक्ष के प्रति सहानुभूति दिखाई थी। जब विपक्ष ने उनसे मिलने का समय मांगा, तो उन्होंने कई कारणों का हवाला देते हुए मिलने से इनकार कर दिया था। हालांकि, उन्होंने कहा था कि यदि विपक्षी नेता याचिका दायर करते हैं, तो उस पर जल्दी सुनवाई की जाएगी। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि उनके इनकार के बाद विपक्ष के नेता सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे और वहां याचिका दायर करेंगे।