सुप्रीम कोर्ट में वोटर लिस्ट विवाद: चुनाव आयोग ने आरोपों को किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की तारीख बढ़ाई
नई दिल्ली: वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और 'वोट चोरी' के आरोपों से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को टाल दिया है। अदालत ने उन याचिकाकर्ताओं को 10 दिन का समय दिया है जो चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग कर रहे हैं। उन्हें चुनाव आयोग द्वारा प्रस्तुत हलफनामे पर अपना उत्तर दाखिल करना होगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन जजों की बेंच ने इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को तय की है। कोर्ट ने इस मामले से संबंधित सभी याचिकाओं पर चुनाव आयोग को नोटिस भी जारी किया है, जिसमें राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं की याचिका भी शामिल है।
चुनाव आयोग ने आरोपों को गलत बताया
यह सुनवाई चुनाव आयोग द्वारा हलफनामा दाखिल करने के एक दिन बाद हुई है। आयोग ने अपने 248 पृष्ठों के जवाब में SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ड्राइव का बचाव किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वोटर लिस्ट से संबंधित सभी निर्णय तीनों सदस्यों की सहमति से लिए गए थे। चुनाव आयोग ने उन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्म-6 में बदलाव किया गया है। आयोग ने इन आरोपों को गलत बताते हुए याचिकाओं को तुरंत खारिज करने की मांग की है।
अपने हलफनामे में आयोग ने बताया कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के SIR से संबंधित सभी आदेश संविधान के आर्टिकल 324 और चुनाव आयुक्त कानून 2023 के तहत सर्वसम्मति से लिए गए थे।
फैसले लेने की प्रक्रिया का खुलासा
आयोग ने अदालत को निर्णय लेने की प्रक्रिया भी समझाई। आयोग ने कहा कि जब कोई फाइल चलती है, तो उस पर किसी आयुक्त का सुझाव या सवाल अंतिम निर्णय नहीं होता। फाइलें पहले एक चुनाव आयुक्त के पास जाती हैं, फिर दूसरे के पास और अंत में CEC के पास आती हैं। मंजूर किए गए फैसलों पर तीनों के हस्ताक्षर होते हैं। यदि कोई अर्जेंट ऑर्डर है और सदस्य उपस्थित नहीं हैं, तो इलेक्ट्रॉनिक तरीके से मंजूरी ली जाती है।
यह विवाद इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ था, जिसमें कहा गया था कि SIR ड्राइव को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच असहमति है। इसी रिपोर्ट के आधार पर राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और CEC को हटाने की मांग की थी।
