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सुष्मिता देव का राज्यसभा से इस्तीफा, टीएमसी को लगा बड़ा झटका

तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुष्मिता देव ने राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा देकर पार्टी को एक और बड़ा झटका दिया है। उन्होंने उपराष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपा और असम के मुख्यमंत्री से मुलाकात की, जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वह बीजेपी में शामिल हो सकती हैं। टीएमसी इस समय गंभीर आंतरिक संकट का सामना कर रही है, जिसमें कई सांसदों ने पार्टी के खिलाफ बगावत की है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और सुष्मिता देव की पहचान।
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सुष्मिता देव का राज्यसभा से इस्तीफा, टीएमसी को लगा बड़ा झटका

सुष्मिता देव का इस्तीफा


नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका मिला है। पार्टी की वरिष्ठ सदस्य सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को सौंपा। इस्तीफे के पत्र में उन्होंने लिखा, "मैं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देती हूं, कृपया इसे तुरंत स्वीकार करें।"


सुष्मिता देव ने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए उपराष्ट्रपति, उप-सभापति और राज्यसभा सचिवालय के सभी कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। इस्तीफा देने के कुछ ही समय बाद, उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की, जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वह जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो सकती हैं।





टीएमसी को दूसरा बड़ा झटका

TMC को दूसरा बड़ा झटका:


राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के लिए यह दूसरा बड़ा झटका है। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय ने भी इस्तीफा दिया था। पार्टी इस समय गंभीर आंतरिक संकट का सामना कर रही है। संसद में स्थिति और भी खराब है। टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने पार्टी के खिलाफ बगावत की और सत्ताधारी एनडीए का समर्थन किया। इससे ममता बनर्जी की स्थिति राष्ट्रीय संसद में काफी कमजोर हो गई है।


टीएमसी की समस्याएं केवल संसद तक सीमित नहीं हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी बड़े पैमाने पर बगावत हुई है, जहां खबरों के अनुसार 58 विधायकों ने बागी नेता रिताब्रता बनर्जी का समर्थन किया। लगातार मिल रहे इन झटकों ने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी पर भारी दबाव बना दिया है।




सुष्मिता देव की पहचान

कौन हैं सुष्मिता देव?


सुष्मिता देव असम की एक प्रमुख राजनीतिक नेता हैं। वह पहले कांग्रेस के टिकट पर सिलचर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद रह चुकी हैं। 2019 का चुनाव हारने के बाद, उन्होंने 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने का निर्णय लिया। पार्टी में तेजी से आगे बढ़ते हुए वह राष्ट्रीय प्रवक्ता बनीं और बाद में उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया। उनके इस्तीफे और हिमंत बिस्वा सरमा के साथ मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना दिया है। कई लोगों का मानना है कि आने वाले दिनों में और भी नेता पार्टी छोड़ सकते हैं।