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सोनम वांगचुक का अनशन: 18वें दिन भी जारी, सरकार से बातचीत की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन दिल्ली के जंतर-मंतर पर 18वें दिन भी जारी है। उनकी सेहत स्थिर है, लेकिन कुछ स्वास्थ्य संकेतकों में गिरावट आई है। वांगचुक ने सरकार से बातचीत शुरू करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। आंदोलन ने राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है। कई जनप्रतिनिधियों और सार्वजनिक हस्तियों ने उनका समर्थन किया है, और संसद के मानसून सत्र के दौरान राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
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सोनम वांगचुक का अनशन जारी


नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन अब 18वें दिन में प्रवेश कर चुका है। आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है, लेकिन कुछ स्वास्थ्य संकेतकों में गिरावट देखी गई है। वांगचुक ने सरकार से बातचीत शुरू करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को बनाए रखा है। इस बीच, उनका आंदोलन एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को चर्चा में ला रहा है।


अनशन समाप्त करने की अपील

आंदोलन से जुड़े अभिजीत दिपके ने बताया कि कई लोग वांगचुक से अनुरोध कर रहे हैं कि वे अपना अनशन समाप्त करें। इस पर वांगचुक का कहना है कि सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह बातचीत शुरू करने से क्यों बच रही है। आंदोलनकारी इसे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हैं।


सरकार के करीबी रहे वांगचुक

मार्च 2023 में सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की थी। उस समय दोनों पक्षों ने शिक्षा के क्षेत्र में नए विचारों पर सकारात्मक चर्चा की थी। लेकिन समय के साथ उनके संबंधों में खटास आ गई, खासकर लद्दाख से जुड़े मुद्दों के कारण।


लद्दाख आंदोलन से उपजा विवाद

वांगचुक ने लद्दाख को अधिक अधिकार और संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग का समर्थन किया। इसके बाद उनके संस्थान की जमीन की लीज रद्द होने और आंदोलन के दौरान गिरफ्तारी जैसी घटनाएं भी सामने आईं। मार्च 2026 में जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने बातचीत के माध्यम से समाधान की उम्मीद जताई थी।


सरकार और आंदोलन का टकराव

हाल के दिनों में केंद्र सरकार ने लद्दाख के लिए नए प्रशासनिक ढांचे और संवैधानिक व्यवस्था के संबंध में कुछ घोषणाएं की हैं। हालांकि, वांगचुक ने इन नए प्रस्तावों पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। उनका अनशन जारी है और समर्थक लगातार उनके साथ खड़े हैं।


राजनीतिक और सामाजिक समर्थन

जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को कई जनप्रतिनिधियों और सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन प्राप्त हुआ है। कुछ विपक्षी नेताओं ने भी वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता व्यक्त की है। 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन आंदोलनकारी संसद मार्च की तैयारी कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और बढ़ सकती हैं।