सोनम वांगचुक का अनशन: लद्दाख के मुद्दों पर फिर से चर्चा में
सोनम वांगचुक का अनशन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई
नई दिल्ली: लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद, इंजीनियर और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर सुर्खियों में हैं। जंतर-मंतर पर 20 दिनों से चल रहे उनके अनशन के दौरान, दिल्ली पुलिस ने उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा। यह पहली बार नहीं है जब वांगचुक ने अपनी मांगों के लिए भूख हड़ताल का सहारा लिया है। पिछले कुछ वर्षों में, उन्होंने कई बार अनशन के माध्यम से सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है।
2023 में छठी अनुसूची की मांग के लिए अनशन
जनवरी 2023 में, सोनम वांगचुक ने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर पांच दिन का अनशन किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय युवाओं के लिए अलग लोक सेवा आयोग की भी मांग की। इस आंदोलन के बाद केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत शुरू हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
2024 में 'क्लाइमेट फास्ट' के माध्यम से पर्यावरण का मुद्दा उठाया
मार्च 2024 में, वांगचुक ने 21 दिनों का 'क्लाइमेट फास्ट' रखा। उनका उद्देश्य लद्दाख के नाजुक पर्यावरण और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना था। अनशन समाप्त होने के बाद भी उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने और दिल्ली मार्च का ऐलान किया, लेकिन उनकी मांगें पूरी नहीं हो सकीं।
दिल्ली मार्च और हिरासत की घटनाएं
सितंबर 2024 में, वांगचुक ने अपने समर्थकों के साथ लद्दाख से दिल्ली तक पदयात्रा शुरू की। जब वे राजधानी की सीमा पर पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें और कई अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इसके बावजूद, आंदोलन जारी रहा और सरकार के साथ बातचीत फिर से शुरू हुई, लेकिन कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई।
2025 और 2026 में आंदोलन की निरंतरता
सितंबर 2025 में, लेह एपेक्स बॉडी के आंदोलन के दौरान, वांगचुक फिर से भूख हड़ताल में शामिल हुए। बाद में, उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया और मार्च 2026 में रिहा किया गया। इसके बाद, जून 2026 में, उन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित नीट परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। उनकी मांग थी कि मामले में जवाबदेही तय हो और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
सोनम वांगचुक के आंदोलनों का प्रभाव
सोनम वांगचुक के कई आंदोलनों ने तुरंत नीतिगत बदलाव नहीं किए, लेकिन उनके अनशन ने हर बार संबंधित मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना दिया। यही कारण है कि वे आज भी शांतिपूर्ण विरोध के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं।
