सोनम वांगचुक का राहुल गांधी पर आरोप: अनशन के दौरान मिली अनदेखी
सोनम वांगचुक की नाराजगी
नई दिल्ली: लद्दाख के पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे उनके अनशन को समाप्त करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन राहुल गांधी ने उनकी अनदेखी की। वांगचुक ने बताया कि इस घटना के बाद उन्हें न केवल कांग्रेस बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के प्रति भी निराशा हुई।
अनशन के दौरान राहुल गांधी से संपर्क की कोशिश
सोनम वांगचुक ने बताया कि उनकी पत्नी गीतांजलि ने राहुल गांधी तक संदेश पहुंचाने और उनसे अनशन समाप्त कराने की कई बार कोशिश की। उनका मानना था कि राहुल गांधी जंतर-मंतर आकर उन्हें जूस पिलाकर भूख हड़ताल खत्म कराएंगे। हालांकि, उन्हें इस संबंध में कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। वांगचुक ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि विपक्ष का कोई प्रमुख नेता उनके आंदोलन का समर्थन करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
केंद्रीय मंत्रियों पर वादा तोड़ने का आरोप
सोनम वांगचुक ने राहुल गांधी के अलावा केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह पर भी वादा न निभाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, दोनों नेताओं ने भरोसा दिलाया था कि उनकी मुलाकात और सूप पिलाने की तस्वीरें तब तक सार्वजनिक नहीं की जाएंगी, जब तक वे स्वयं अनशन समाप्त नहीं कर देते। लेकिन बाद में ये तस्वीरें सार्वजनिक कर दी गईं, जिससे उनका विश्वास कमजोर हुआ।
राजनीतिक दलों की निष्क्रियता पर नाराजगी
वांगचुक ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान कई राजनीतिक दलों के नेता या तो नहीं आए या फिर काफी देर से पहुंचे। उनका मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर राजनीतिक नेतृत्व को अधिक सक्रियता दिखानी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पत्नी ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने के फैसले पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा।
नेतृत्व से निराशा
वांगचुक ने कहा कि राजनीतिक दलों के समर्थकों को आलोचना को खुले मन से स्वीकार करना चाहिए। उनका मानना है कि लोकतंत्र में विभिन्न विचारों के लिए स्थान होना चाहिए और नेताओं को जनता के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी दल को निशाना बनाना नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों पर व्यापक समर्थन प्राप्त करना था।
