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सोनिया गांधी का विवादास्पद बयान: बाबरी मस्जिद के ढहने पर आंसू बहाए

सोनिया गांधी ने बाबरी मस्जिद के ढहने पर अपने आंसू बहाने का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों की रक्षा के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने अपने नए पुस्तक के प्रचार के दौरान कई मुद्दों पर बात की, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विचारधारा और कांग्रेस के भविष्य पर उनके विचार शामिल हैं। जानें उनके बयान का राजनीतिक महत्व और इसके पीछे की सोच।
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सोनिया गांधी का बयान


नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले, कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी ने राज्य की राजनीति पर गहरा प्रभाव डालने वाला एक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया जा रहा था, तब वह बहुत रोई थीं। ब्रिटिश समाचार पत्र 'द गार्जियन' को दिए गए एक साक्षात्कार में, सोनिया ने कहा कि उनके आंसू थम नहीं रहे थे और उन्हें महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों की रक्षा के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी।


सोनिया गांधी की नई किताब 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' 10 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है। इस किताब के प्रचार के लिए उन्होंने विभिन्न इंटरव्यू दिए हैं। उन्होंने अंग्रेजी समाचार पत्र 'द हिंदू' को भी एक साक्षात्कार दिया, जिसमें उन्होंने 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने से लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा और आपातकाल से जुड़े सवालों का जवाब दिया।


सोनिया ने राजीव गांधी से जुड़े एक सवाल पर कहा, 'राजीव से मुलाकात के 60 साल बाद भी मैं वही इंसान हूं, बस अब पहले जितना हंसती नहीं।' उन्होंने यह भी बताया कि उनके बच्चे राहुल और प्रियंका नहीं चाहते थे कि वह प्रधानमंत्री बनें।


साक्षात्कार के दौरान, सोनिया ने राजीव गांधी के साथ अपने रिश्ते, आपातकाल, कांग्रेस के भविष्य और देश की वर्तमान राजनीति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच भारत के लिए अलग है। एक सवाल के जवाब में, उन्होंने कहा कि मोदी एक अलग विचारधारा के साथ आए हैं।


सोनिया ने पिछले 12 वर्षों में देश के लोकतंत्र और संस्थाओं को हुए नुकसान पर भी चिंता व्यक्त की। आपातकाल से जुड़े एक सवाल पर, उन्होंने संजय गांधी का नाम लिया और कहा कि 'इसके लिए केवल संजय गांधी जिम्मेदार नहीं थे, हालांकि आम लोगों की नजर में उनका नाम आपातकाल का पर्याय बन गया है।'


भाजपा, मोदी और आरएसएस से जुड़े सवालों पर सोनिया ने कहा, 'यह सच है कि मोदी बिल्कुल अलग वैचारिक दुनिया से आते हैं। लेकिन राजनीति में सफलता हासिल करने के कई रास्ते होते हैं।' उन्होंने कांग्रेस पार्टी के भीतर डॉ. मनमोहन सिंह और मल्लिकार्जुन खड़गे का उदाहरण दिया।


सांप्रदायिकता पर कांग्रेस के सख्त रुख के बारे में पूछे जाने पर, सोनिया ने कहा, 'मैं मानती हूं कि पार्टी के भीतर कुछ ऐसे लोग रहे हैं, जो महसूस करते थे कि धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर हमें स्पष्ट और दो टूक रुख नहीं अपनाना चाहिए। लेकिन यह पार्टी का आधिकारिक नजरिया नहीं है।'