सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर शिक्षा संकट को लेकर किया हमला
सोनिया गांधी का तीखा बयान
नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। 'द हिंदू' में प्रकाशित अपने लेख 'एन एजुकेशन सिस्टम्स कोलैप्स, यंग इंडियाज ट्रॉमा' में उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार छात्रों की मांगों को 'देश का दुश्मन' मान रही है। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी जायज मांगों के लिए सड़कों पर हैं, लेकिन सरकार उनके साहस का जवाब हिंसा से दे रही है।
पुलिस की बर्बरता पर उठाए सवाल
सोनिया गांधी ने कहा कि देशभर में परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में गिरावट के खिलाफ छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांगें स्पष्ट हैं - सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए और शिक्षा में सुधार लाना चाहिए। उन्होंने 20 जुलाई 2026 का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र बलों ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल किया।
शिक्षा बजट में कटौती और निजीकरण
सोनिया गांधी ने शिक्षा संकट के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने स्कूल शिक्षा के बजट में 50 प्रतिशत और उच्च शिक्षा के बजट में 33 प्रतिशत की कटौती की है। पिछले 12 वर्षों में लगभग 1 लाख सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं, जबकि 43,000 निजी स्कूल खोले गए हैं।
परीक्षा प्रणाली में गिरावट
उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका केंद्रीयकरण और निजीकरण किया गया है। एनटीए में कर्मचारियों की कमी है और यह निजी ठेकेदारों पर निर्भर है। इसके परिणामस्वरूप पिछले 12 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए हैं।
रोजगार की कमी
सोनिया गांधी ने कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं के पास अच्छी नौकरियों के अवसर नहीं हैं। इसके बावजूद शिक्षा मंत्री ने संसदीय समिति की सिफारिशों को खारिज कर दिया। उन्होंने छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि आज छात्रों के साथ खड़ा होना और उनके भविष्य की रक्षा करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
