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हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी: हुड्डा और सुरजेवाला के बीच तंज

हरियाणा में कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटबाजी की स्थिति ने एक नया मोड़ लिया है। नए प्रभारी संजय दत्त के सामने भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रणदीप सुरजेवाला ने एक-दूसरे पर कटाक्ष किए। हुड्डा ने सुरजेवाला को साथ आने का आमंत्रण दिया, जबकि सुरजेवाला ने पिछले चुनावों के नतीजों पर सवाल उठाए। जानें कैसे यह आंतरिक संघर्ष पार्टी की भविष्य की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
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हरियाणा कांग्रेस की आंतरिक राजनीति


हरियाणा में कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी इस बार खुलकर सामने आई है। नए प्रभारी संजय दत्त के आगमन पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रणदीप सुरजेवाला ने एक-दूसरे पर कटाक्ष किए। संजय दत्त ने सभी नेताओं को एक मंच पर बुलाया था। जब हुड्डा ने बोलने का अवसर पाया, तो उन्होंने कहा कि यदि सुरजेवाला उनके साथ आएं, तो वे भाजपा को हराने में सफल हो सकते हैं। इसके बाद सुरजेवाला ने जवाब दिया कि वे पिछले 20 वर्षों से हुड्डा का साथ दे रहे हैं और अब हुड्डा को उनकी मदद करनी चाहिए ताकि कांग्रेस को जीत दिलाई जा सके।


सुरजेवाला ने पिछले चुनावों के परिणामों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर बार वोट प्रतिशत बढ़ने की बात होती है, लेकिन 46 सीटें जीतने के लिए आवश्यक हैं, जो कांग्रेस को नहीं मिल रही हैं। पिछली बार कांग्रेस जीतने के करीब थी, लेकिन कुमारी शैलजा की निष्क्रियता के कारण दलित वोट बिखर गए, जिससे हार हुई।


यह ध्यान देने योग्य है कि हरियाणा में कांग्रेस पिछले तीन चुनावों में हार चुकी है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा लगातार 10 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे, लेकिन 2014 से अब तक पार्टी को तीन बार हार का सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद, हुड्डा की पकड़ पार्टी पर मजबूत बनी हुई है। पहले हरियाणा में हुड्डा विरोधी गुट को एसआरके कहा जाता था, जिसमें शैलजा, रणदीप और किरण चौधरी शामिल थे। हालांकि, किरण चौधरी भाजपा में शामिल हो गईं। कुलदीप बिश्नोई पहले ही भाजपा में जा चुके हैं।


हालांकि, चौधरी बीरेंद्र सिंह का परिवार कांग्रेस में वापस लौट आया है। बीरेंद्र सिंह और उनके बेटे ब्रजेंद्र सिंह तटस्थ बने हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, कुमारी शैलजा और रणदीप सुरजेवाला एकजुट हैं। राहुल गांधी भी चाहते हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा की जगह नए नेता को कमान सौंपी जाए। दूसरी ओर, हुड्डा अपने बेटे दीपेंद्र को पार्टी की कमान सौंपने की योजना बना रहे हैं। इस प्रकार, कांग्रेस के भीतर संघर्ष आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।