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हरीश रावत ने कांग्रेस पदों से इस्तीफा दिया, पूर्व पीए के ठिकानों पर छापे में मिली ज्वेलरी और नकदी

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने पीए के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी के बाद कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। छापे में भारी मात्रा में नकद और ज्वेलरी बरामद की गई। रावत ने नियुक्तियों में गड़बड़ी के लिए क्षमा मांगी और कहा कि यदि उनकी किसी गलती से युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है, तो वह दंड के लिए तैयार हैं। जानें इस मामले में और क्या कहा रावत ने।
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उत्तराखंड में हरीश रावत का इस्तीफा

उत्तराखंड: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने UKSSSC VPDO परीक्षा 2016 में हुई अनियमितताओं के सिलसिले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ओएसडी और पीए चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में नकद, सोने के सिक्के, चेन और महंगी घड़ियां बरामद की गईं। इसके बाद, रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारिणी सदस्य और स्थायी आमंत्रित सदस्य दोनों पदों से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।


हरीश रावत ने कहा कि नियुक्तियों और परीक्षाओं में गड़बड़ी से हमारी युवा पीढ़ी का भविष्य प्रभावित हो रहा है। यदि मेरी किसी भी प्रकार की गलती से राज्य के युवाओं के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, तो मैं इसके लिए खुद को दंडित मानता हूं। उन्होंने राज्य के लोगों से क्षमा मांगी और अपील की कि यदि किसी को उनकी संलिप्तता के सबूत मिलें, तो उन्हें सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को सौंपें।



उन्होंने कहा कि जो लोग बड़े दायित्वों को संभालते हैं, उन्हें ऐसे प्रलोभनों से बचना चाहिए। यदि मुझसे कोई गलती हुई है, तो मैं इसे स्वीकार करता हूं और कानून को मुझे दंडित करना चाहिए।


पूर्व मुख्यमंत्री ने ईडी की कार्रवाई को आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से भी जोड़ा। उन्होंने मजाक में कहा कि जब लोग मुझसे चुनावों के बारे में पूछते हैं, तो मैं कहता हूं कि जब सीबीआई मेरे घर आएगी, तब समझ लेना चुनाव आ गए हैं।



उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर लड़ रही है और यदि किसी भी कृत्य से पार्टी के संघर्ष में कमजोरी आती है, तो वह नहीं चाहते। इसलिए, उन्होंने अपने ईष्ट देवता का स्मरण करते हुए यह निर्णय लिया कि वह कांग्रेस के दोनों पदों से हटना चाहेंगे।