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हल्द्वानी में मंच शुद्धिकरण विवाद: कांग्रेस और मायावती की तीखी प्रतिक्रिया

हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद मंच के शुद्धिकरण का विवाद छिड़ गया है। राहुल गांधी ने इसे संविधान का अपमान बताया, जबकि मायावती ने कानूनी कार्रवाई की मांग की है। यह घटना भाजपा और आरएसएस की मनुवादी सोच को उजागर करती है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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हल्द्वानी में मंच शुद्धिकरण का मुद्दा

हल्द्वानी मंच शुद्धिकरण विवाद: उत्तराखंड के हल्द्वानी में 8 अगस्त को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद मंच के 'शुद्धिकरण' का मामला चर्चा का विषय बन गया है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे ने इस मुद्दे को मॉनसून सत्र के अंतिम दिन उठाया, जिसके बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला किया।

कांग्रेस का आरोप है कि खरगे की सभा के बाद मंच का शुद्धिकरण केवल उनके दलित होने के कारण किया गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा, "हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी की सभा के बाद मंच का 'शुद्धिकरण' सिर्फ़ एक व्यक्ति का अपमान नहीं है, बल्कि यह उस संविधान का अपमान है जिसने छुआछूत को अपराध माना है। यह एक अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह भाजपा-आरएसएस की मनुवादी सोच का परिणाम है, जो आज भी इंसान की पहचान उसके जन्म से तय करती है।"



मायावती की कानूनी कार्रवाई की मांग

हल्द्वानी की घटना पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए मायावती ने कहा, "उत्तराखंड के हल्द्वानी में हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद उनके मंच का दलित होने के कारण शुद्धिकरण किया गया। यह मामला अत्यंत निंदनीय और चिंतनीय है। सरकार को बिना देरी किए जातिवादी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस के मुखिया को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।



मायावती ने आगे कहा, "हाल ही में महाराष्ट्र के नांदेड़ में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की घटना भी अत्यंत दुखद और चिंतनीय है। केंद्र और महाराष्ट्र की सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।"