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हिंदू समाज की दोहरी चुनौती: विश्वासघात और ब्लैकमेलिंग

हिंदू समाज आज दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है, जिसमें संघ परिवार का विश्वासघात और राजनीतिक ब्लैकमेलिंग शामिल हैं। क्या इससे कोई बदलाव आएगा? इस लेख में हम इन मुद्दों पर चर्चा करेंगे और जानेंगे कि कैसे भाजपा ने अपने समर्थकों को बरगलाने का काम किया है। क्या वास्तव में कोई विकल्प है, या सब कुछ केवल दिखावा है? जानें इस लेख में।
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हिंदू समाज की स्थिति


हिंदू समाज आज दोहरी चोट झेल रहा है - एक ओर संघ परिवार का विश्वासघात और दूसरी ओर राजनीतिक ब्लैकमेलिंग। क्या इससे कोई बदलाव आएगा? नहीं, क्योंकि राजा बाबू ने सब कुछ संभाल लिया है। संवैधानिक संस्थाओं पर धब्बा लगने के बावजूद चुनावी खेल में वही जीतते रहेंगे। बाकी समाज बस देखता रहेगा।


संघ परिवार का तर्क है कि भाजपा का कोई विकल्प नहीं है, जिसे 2003 में 'टीना' (There Is No Alternative) के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इस तर्क के तहत, भाजपा को समर्थन देने की अपील की जाती है। कांग्रेस की स्थिति इतनी कमजोर है कि कोई भी उन्हें समर्थन नहीं देगा।


भाजपा के नेता अब पहले से अधिक चतुर हो गए हैं। चुनाव जीतने के लिए उन्होंने सभी तकनीकी कमियों को दूर कर लिया है। उनका मुख्य उद्देश्य है कि कोई प्रतिद्वंद्वी टीम न बने। इसके लिए वे अपने प्रतिद्वंद्वियों को दूर रखते हैं और अपनी टीम में योग्य खिलाड़ियों को बाहर कर देते हैं।


हालांकि, पिछले दस वर्षों में संघ-भाजपा द्वारा जो उपलब्धियाँ गिनाई जाती थीं, अब उन पर चर्चा नहीं होती। भ्रष्टाचार, स्वदेशी आर्थिकी, और चीन को झुकाने जैसे मुद्दे अब चर्चा से बाहर हैं।


देश ने देखा है कि चीन की स्थिति क्या है, जबकि बांग्लादेश में हिंदुओं का कत्ल और अपमान होता रहा है। भाजपा के नेता इस पर चुप हैं, जबकि कांग्रेस के समय में संघ परिवार ने इस मुद्दे को उठाया था।


शिक्षा क्षेत्र में स्थिति और भी खराब हो गई है। महत्वपूर्ण संस्थानों की स्वायत्तता छिन गई है और विद्या की गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है।


यह स्थिति गंभीर है, और संघ-भाजपाई भी इसे मानते हैं। लेकिन वे कहते हैं कि भाजपा के हारने से क्या होगा? उनके पास चुनाव छोड़कर कोई विचार नहीं है।


भारत में नेताओं के पास अपनी नीतियों की आलोचना के लिए कोई तर्क नहीं है। वे केवल एकतरफा भाषण देते हैं और मीडिया का सामना नहीं करते।


इस स्थिति को छिपाने के लिए वे अनर्गल भाषणों का सहारा लेते हैं। भाजपा के समर्थक यह मानते हैं कि भाजपा के हारने से वामपंथी और इस्लामी लोग सत्ता में आ जाएंगे।


यह एक प्रकार की ब्लैकमेलिंग है, क्योंकि भाजपा की सत्ता में रहते हुए भी हिंदू विरोधी नीतियों को खत्म नहीं किया गया।


इसलिए, हिंदू समाज आज भी दोहरी चोट झेल रहा है - संघ परिवार का विश्वासघात और राजनीतिक ब्लैकमेलिंग। क्या इससे कोई फर्क पड़ेगा? नहीं, क्योंकि राजा बाबू ने सब कुछ संभाल लिया है।