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बिहार में स्मार्ट मीटर के बैलेंस में गिरावट से उपभोक्ता परेशान

बिहार के कैमूर जिले में स्मार्ट मीटर के बैलेंस में अचानक कमी आने से उपभोक्ता चिंतित हैं। भभुआ स्थित विद्युत विभाग में शिकायतें बढ़ रही हैं, जहां उपभोक्ता रिचार्ज के बाद भी बैलेंस में गिरावट का सामना कर रहे हैं। विभाग ने इसे सॉफ्टवेयर में बदलाव और लंबित मीटर रीडिंग के समायोजन से जोड़ा है। जानें इस समस्या के पीछे के कारण और विभाग की प्रतिक्रिया के बारे में।
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स्मार्ट मीटर में बैलेंस की समस्या


पटना: बिहार के कैमूर जिले में स्मार्ट मीटर के बैलेंस में अचानक कमी आने से कई उपभोक्ता चिंतित हैं। सोमवार को भभुआ स्थित विद्युत विभाग के कार्यालय में कई लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचे। उपभोक्ताओं का कहना है कि रिचार्ज करने के बाद उनके मीटर में पर्याप्त राशि थी, लेकिन मीटर रीडिंग अपडेट होने के बाद बैलेंस में बदलाव आया। विभाग ने इसे सॉफ्टवेयर में बदलाव के कारण बिलिंग में रुके समायोजन से जोड़ा है।


रिचार्ज के बाद बैलेंस में अचानक बदलाव

भभुआ कार्यालय में उपस्थित उपभोक्ताओं ने बताया कि उनके स्मार्ट मीटर में पहले प्लस बैलेंस था। कुछ उपभोक्ताओं के खातों में 500 रुपये या उससे अधिक की राशि भी दिखाई दे रही थी। लेकिन जब रीडिंग अपडेट हुई, तो यह राशि कम हो गई और कई मामलों में बैलेंस शून्य या माइनस में चला गया। इससे लोगों को लगा कि उनके खाते से अतिरिक्त राशि काट ली गई है।


विभाग ने माइनस बैलेंस का कारण बताया

सहायक विद्युत अभियंता राकेश प्रभाकर और कनीय विद्युत अभियंता रमाकांत सिंह ने उपभोक्ताओं को स्थिति स्पष्ट की। अधिकारियों के अनुसार, जून से अगस्त के बीच ऊर्जा खपत के आधार पर एनर्जी चार्ज निर्धारित प्रक्रिया के तहत कटता रहा। हालांकि, सॉफ्टवेयर में बदलाव के कारण बिलिंग का पूरा हिसाब तुरंत अपडेट नहीं हो सका था।


पुराने हिसाब का समायोजन

आरएमएस सॉफ्टवेयर के लागू होने के बाद लंबित मीटर रीडिंग और बिजली खपत के आंकड़े सिस्टम में डाले जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, 30 अगस्त से पिछले महीनों की खपत का हिसाब अपडेट किया गया। इसके बाद पहले से उपयोग की गई बिजली की राशि उपभोक्ताओं के बैलेंस में एक साथ समायोजित होने लगी।


माइनस बैलेंस का कारण

विभाग के अनुसार, माइनस बैलेंस दिखने का मुख्य कारण अचानक की गई कोई नई कटौती नहीं है, बल्कि पिछली बिजली खपत की लंबित बिलिंग का समायोजन है। सॉफ्टवेयर परिवर्तन के कारण जो प्रक्रिया कुछ समय के लिए प्रभावित हुई थी, उसे अब नए सिस्टम में पूरा किया जा रहा है। इसी कारण कुछ उपभोक्ताओं के खातों में पहले मौजूद राशि घटकर शून्य या माइनस में दिखाई दे रही है।