मधुबनी जेल में युवक की मौत: प्रशांत किशोर ने न्याय की मांग की
प्रशांत किशोर का मधुबनी दौरा
मधुबनी जेल में एक युवक की संदिग्ध मौत के मामले में जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने पुलिस प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है। शनिवार की शाम को वह मधुबनी पहुंचे और सबसे पहले रौशन यादव के परिवार से मिले। इसके बाद, उन्होंने एसएसपी योगेंद्र कुमार के कार्यालय का दौरा किया।
परिवार को न्याय की आवश्यकता
प्रशांत किशोर ने एसएसपी के समक्ष मामले की गंभीरता को रखा और कहा कि रौशन के परिवार को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है, और रौशन के पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। अब परिवार में केवल उसकी मां और दो बहनें हैं। एसएसपी से मुलाकात के बाद, प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत की।
जांच का आश्वासन
प्रशांत किशोर ने कहा कि पुलिस अधिकारी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि मामले की जांच 10 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी। यदि जांच में किसी की गलती सामने आती है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर 10 दिन में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वह फिर से मधुबनी आएंगे और जरूरत पड़ने पर बिहार के डीजीपी और मुख्य सचिव से भी मिलेंगे।
गिरफ्तारी और मौत की परिस्थितियाँ
परिवार के अनुसार, रौशन को 27 मई को रहिका थाना की पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी तुरंत नहीं दी गई। लगभग तीन दिन बाद परिवार को पता चला कि वह थाने में बंद है। परिवार ने पुलिस पर रौशन के साथ मारपीट और प्रताड़ना का आरोप लगाया है।
परिजनों का कहना है कि 31 मई को रौशन को थाने से रिहा किया गया, लेकिन आधे घंटे बाद उसे फिर से आर्म्स एक्ट के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद, उसे मधुबनी मंडल कारा भेज दिया गया, जहां वह न्यायिक हिरासत में था। 10 अगस्त को उसकी जेल में मौत हो गई।
मौत के कारणों पर विवाद
रौशन की मौत को लेकर पुलिस और परिवार के दावे भिन्न हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि युवक ने आत्महत्या की, जबकि परिवार इसे हत्या मानता है। मृतक की बहन ममता कुमारी ने कहा कि रौशन दो दिन पहले तक पूरी तरह स्वस्थ था। 10 अगस्त की रात अचानक उसकी मौत की सूचना परिवार को दी गई। प्रशांत किशोर ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के असली कारणों का पता चलेगा।
न्यायिक जांच के आदेश
रौशन यादव की न्यायिक हिरासत में मौत के बाद, मधुबनी के डीएम आनंद शर्मा ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच की जिम्मेदारी वरीय उप समाहर्ता बिरजू दास को सौंपी गई है। रौशन 19 साल का था और मधुबनी के अररे थाना क्षेत्र के भदुली कोकाई टोला का निवासी था। उसके खिलाफ रहिका थाना में आर्म्स एक्ट के तीन मामले दर्ज हैं। अब सभी की नजर जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है, जो यह स्पष्ट करेगी कि जेल में रौशन की मौत किन परिस्थितियों में हुई। प्रशांत किशोर ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
