दिल्ली में NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी
जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन
दिल्ली की जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का आंदोलन लगातार जारी है। विभिन्न राज्यों से आए छात्र परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक के मामलों में कड़ी कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस बीच, पिछले 26 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आंदोलनकारियों से संयम और शांति बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि आंदोलन की ताकत उसकी अहिंसक प्रकृति में है, जिसे हर हाल में बनाए रखना चाहिए।
सोनम वांगचुक का शांति संदेश
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "दिन 26... शांति और केवल शांति ही मेरा रास्ता है।" उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन अब तक शांतिपूर्ण रहे हैं, लेकिन उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ स्थानों पर असामाजिक तत्व इस आंदोलन का फायदा उठाकर हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि किसी भी उकसावे का जवाब हिंसा से नहीं, बल्कि शांति और संयम से दिया जाए। वांगचुक ने कहा कि सामने वाला पक्ष चाहे जैसा व्यवहार करे, आंदोलनकारियों की प्रतिक्रिया हमेशा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होनी चाहिए।
31वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी
CJP और छात्रों का संयुक्त आंदोलन अब 31वें दिन में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। छात्रों ने बार-बार कहा है कि उनका उद्देश्य केवल परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी मुद्दे पर संसद के मानसून सत्र में भी सरकार और विपक्ष के बीच टकराव जारी है।
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता में गतिरोध
आंदोलन के साथ-साथ सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की कोशिशें भी चल रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने हाल ही में प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की इच्छा जताई थी और सरकारी स्तर पर वार्ता का प्रस्ताव भी दिया था। हालांकि, सूत्रों के अनुसार CJP किसी केंद्रीय मंत्री के सरकारी आवास या कार्यालय में बैठक के लिए तैयार नहीं है। संगठन का कहना है कि बातचीत किसी तटस्थ स्थान पर होनी चाहिए, ताकि दोनों पक्ष समान आधार पर चर्चा कर सकें। इस प्रकार, एक ओर आंदोलन जारी है और दूसरी ओर समाधान की दिशा में संवाद का रास्ता अभी भी खुलने का इंतजार कर रहा है।
