Newzfatafatlogo

दिल्ली में इमारत गिरने से छात्रों में बढ़ी चिंता और सुरक्षा के सवाल

दिल्ली के सत्या निकेतन में एक 5-मंजिला इमारत गिरने से छात्रों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस घटना ने छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की कमी के मुद्दे को फिर से उजागर किया है। दूर-दराज से आए छात्रों के परिजन अपने बच्चों को घर लौटने की सलाह दे रहे हैं। जानें इस घटना के बाद छात्रों के सामने क्या चुनौतियाँ हैं और वे किस प्रकार के विकल्प तलाश रहे हैं।
 | 

सत्या निकेतन में इमारत गिरने की घटना


दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के निकट सत्या निकेतन में रविवार को एक 5-मंजिला इमारत के गिरने से स्थिति गंभीर हो गई है। यह इमारत लगभग 40 से 50 साल पुरानी थी और छात्रों के लिए पीजी के रूप में उपयोग की जा रही थी। हादसा उस समय हुआ जब बेसमेंट में मरम्मत का कार्य चल रहा था। पुलिस ने इस मामले में मकान मालिक के खिलाफ FIR दर्ज कर दी है। इस घटना ने आसपास रहने वाले हजारों छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


परिजनों की चिंता और छात्रों की मजबूरी

इस दुर्घटना के बाद, दूर-दराज से आए छात्रों के परिवारों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई अभिभावक अपने बच्चों को तुरंत घर लौटने या रिश्तेदारों के पास शिफ्ट होने की सलाह दे रहे हैं। छात्रों को प्रति माह 15,000 से 20,000 रुपये का भारी किराया चुकाने के बावजूद घटिया बुनियादी ढांचे, सीवेज की समस्याओं, जलजमाव और सुरक्षा गार्डों की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।


छात्रों के लिए विकल्पों की कमी

दिल्ली से बाहर के छात्रों, जैसे कि राजस्थान, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से आए छात्रों के लिए तुरंत नए विकल्प खोजना आसान नहीं है। छात्रों का कहना है कि क्षेत्र में अधिकांश पीजी एक समान 4-5 मंजिला इमारतों में स्थित हैं और इनमें सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। नए पीजी में जाने पर उन्हें सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) के रूप में बड़ी राशि का भुगतान करना पड़ता है, जिससे उनका वित्तीय बोझ बढ़ जाता है।


DU में आवास की समस्या

यह घटना दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की कमी के पुराने मुद्दे को फिर से उजागर करती है। साउथ कैंपस के हजारों छात्र निजी पीजी पर निर्भर हैं, क्योंकि विश्वविद्यालय के हॉस्टल की सीटें बहुत सीमित हैं। इस दुखद घटना के बाद छात्रों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वे अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए कहां जाएं और कौन सा क्षेत्र वास्तव में सुरक्षित है।