Newzfatafatlogo

दिल्ली में छात्रावास इमारत गिरने पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

दिल्ली के सत्य निकेतन में एक छात्रावास की इमारत गिरने की घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट ने MCD और दिल्ली विश्वविद्यालय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए PG और हॉस्टल व्यवस्थाओं की जानकारी मांगी है। अदालत ने सभी संबंधित विभागों को 10 दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। जानें इस मामले में और क्या कहा गया है और बचाव अभियान की स्थिति क्या है।
 | 

दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने का मामला


दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में एक छात्रावास की इमारत गिरने की घटना ने प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई करते हुए MCD और दिल्ली विश्वविद्यालय की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने PG और हॉस्टल व्यवस्थाओं, भवनों की स्वीकृति और छात्रों की संख्या से संबंधित जानकारी मांगी है।


हाईकोर्ट की टिप्पणी: केवल बिल्डिंग मालिक नहीं हैं जिम्मेदार

दिल्ली हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने कहा कि सत्य निकेतन में हुई घटना को केवल भवन मालिक की जिम्मेदारी मानना उचित नहीं है। अदालत ने MCD और दिल्ली विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने इसे गंभीर घटना बताते हुए कहा कि यह दिल्ली में बाहर से पढ़ने आने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल की कमी को भी उजागर करता है।


PG और हॉस्टल व्यवस्था पर रिपोर्ट की मांग

अदालत ने MCD से पूछा कि PG और हॉस्टल के नियमन के लिए दिल्ली में कौन से नियम लागू हैं। इसके साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई कि क्या हादसे वाली इमारत को निर्माण और अन्य आवश्यक मंजूरियां प्राप्त थीं। MCD को दिल्ली में संचालित PG हॉस्टल की इमारतों की वैधता, निर्माण स्थिति और वहां रहने वाले छात्रों की संख्या का ब्योरा देने का निर्देश दिया गया है।


10 दिन में हलफनामा दाखिल करने का आदेश

हाईकोर्ट ने सभी संबंधित विभागों को 10 दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि भवनों के निर्माण और मरम्मत को नियमों के अनुसार सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से भी पूछा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।


बचाव अभियान को तेज करने का निर्देश

सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने सत्य निकेतन की ढही इमारत में फंसे छात्रों को निकालने के प्रयासों को तेज करने का आदेश दिया। केंद्र सरकार, MCD और दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि बचाव और राहत के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर हादसे से संबंधित संवेदनशील वीडियो साझा करने के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि पीड़ितों की स्थिति को सनसनीखेज तरीके से प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए।