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दिल्ली में बिजली चोरी: आंकड़े और कार्रवाई की स्थिति

दिल्ली में बिजली चोरी की समस्या को रोकने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या अभी भी बनी हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिजली वितरण कंपनियों को 383 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हालांकि, पिछले वर्षों की तुलना में नुकसान में कमी आई है। जानें क्षेत्रवार नुकसान, 2002 के बाद के बदलाव और बिजली चोरी रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में।
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बिजली चोरी की समस्या का सामना


दिल्ली में बिजली चोरी को रोकने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, फिर भी यह समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, बिजली चोरी और मीटरों में छेड़छाड़ के कारण बिजली वितरण कंपनियों को लगभग 383 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।


पिछले वर्षों की तुलना में सुधार

हालांकि, पिछले वर्षों की तुलना में बिजली वितरण में होने वाले नुकसान में उल्लेखनीय कमी आई है। BSES और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) के आंकड़ों के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष में दिल्ली में बिजली वितरण से संबंधित कुल तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान लगभग 5 से 6 प्रतिशत के बीच रहा है। इस नुकसान का मुख्य कारण बिजली चोरी को माना गया है।


क्षेत्रवार नुकसान का विश्लेषण

आंकड़ों के अनुसार, BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) के क्षेत्र में नुकसान लगभग 6 प्रतिशत रहा। वहीं, BSES यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) के क्षेत्र में यह आंकड़ा 5.83 प्रतिशत और TPDDL के क्षेत्रों में 5.41 प्रतिशत दर्ज किया गया।


दक्षिण और पश्चिमी दिल्ली के BSES क्षेत्रों में बिजली चोरी और अन्य वितरण नुकसान के कारण लगभग 211 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। पूर्वी और मध्य दिल्ली में यह आंकड़ा लगभग 136 करोड़ रुपये रहा, जबकि उत्तर और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के टाटा पावर क्षेत्रों में करीब 36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।


2002 में नुकसान की स्थिति

दिल्ली में बिजली वितरण प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव 2002 में हुआ, जब इसे निजी कंपनियों को सौंपा गया। उस समय बिजली वितरण में होने वाला नुकसान बहुत अधिक था। BSES के क्षेत्रों में यह नुकसान लगभग 55 प्रतिशत और टाटा पावर के क्षेत्रों में 53 प्रतिशत था। समय के साथ, बिजली कंपनियों ने मीटरिंग, निगरानी और चोरी रोकने के लिए कई उपाय किए, जिससे यह नुकसान अब घटकर 5 से 6 प्रतिशत के स्तर पर आ गया है।


बिजली चोरी रोकने के लिए उठाए गए कदम

आंकड़ों से स्पष्ट है कि पिछले दो दशकों में दिल्ली में बिजली वितरण का नुकसान काफी कम हुआ है। फिर भी, कुछ क्षेत्रों में बिजली चोरी और मीटर से छेड़छाड़ एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। बिजली कंपनियां चोरी रोकने के लिए दिल्ली सरकार और पुलिस के सहयोग से कार्रवाई कर रही हैं। इसके अलावा, बिजली चोरी के मामलों की पहचान और जांच के लिए निगरानी भी बढ़ाई जा रही है।


दिल्ली में 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा दी जाती है, लेकिन इसका लाभ केवल वैध कनेक्शन और मीटर वाले उपभोक्ताओं को मिलता है। इस प्रकार, बिजली चोरी करने से न केवल कंपनियों को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि यह बिजली व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव डालता है।