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दिल्ली में वायु गुणवत्ता में वृद्धि, 2026 में प्रदूषण के नए रिकॉर्ड

दिल्ली में वायु गुणवत्ता के हालिया आंकड़े चिंताजनक हैं, जहां 2026 में प्रदूषण के स्तर में वृद्धि हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, इस वर्ष औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। विशेष रूप से, जुलाई 2019 के बाद से सबसे अधिक प्रदूषित महीना रहा। सांसद अजय माकन ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए आयोग से वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। जानें और क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
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दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी किए गए दैनिक बुलेटिन के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 167.6 रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 164.3 था। इसी तरह, जनवरी से अगस्त तक का औसत AQI 175.7 दर्ज किया गया, जो 2025 के 171.7 से अधिक है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि इस वर्ष दिल्लीवासियों ने पिछले वर्ष की तुलना में अधिक प्रदूषित हवा में सांस ली है।


CAQM पर आंकड़े छिपाने का आरोप

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 2026 में जनवरी से अगस्त के बीच मासिक आंकड़ों की कोई जानकारी नहीं दी और केवल 30 सितंबर को एक विज्ञप्ति जारी की। इस विज्ञप्ति में भी जनवरी से सितंबर का औसत AQI शामिल नहीं था, जो कि 2025 की रिपोर्ट में था। इसके अलावा, 2025 में प्रदूषण की तुलना 2018 के आंकड़ों से की जाती थी, जबकि इस बार इसे 2022 से दिखाया गया है, जिससे हवा की वास्तविक स्थिति को छिपाने का प्रयास किया गया है।


जुलाई 2019 के बाद सबसे अधिक प्रदूषित महीना

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2026 के फरवरी, मार्च, जुलाई और अगस्त के महीने 2025 की तुलना में अधिक प्रदूषित रहे। विशेष रूप से, जुलाई 2026 का औसत AQI 117.8 तक पहुंच गया, जबकि 2025 में यह 78.4 था। आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, यह जुलाई 2019 के बाद से दिल्ली में सबसे खराब जुलाई साबित हुआ है।


गंभीर प्रदूषण के घंटों में वृद्धि

दोनों वर्षों में निरंतर आंकड़े देने वाले 39 वायु निगरानी स्टेशनों के रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2026 में कुल 796 घंटे AQI पैमाने के अंतिम अंक यानी 500 पर रहा। यह 2025 के 256 घंटे की तुलना में तीन गुना अधिक है। इन अत्यधिक प्रदूषित घंटों में PM2.5 का औसत स्तर 439 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मापा गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 24 घंटे के सुरक्षा मानक से 29 गुना अधिक है।


स्वच्छ हवा वाले दिनों में कमी

वर्ष 2026 के पहले 273 दिनों में से केवल 60 दिन ऐसे थे जब हवा 'अच्छी' या 'संतोषजनक' श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि 2025 में ऐसे दिनों की संख्या 75 थी। आयोग ने अपनी विज्ञप्ति में इस साल 'सबसे कम PM2.5 स्तर' का दावा किया, जबकि उसने 2025 और 2026 दोनों के लिए PM2.5 का स्तर 69 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर ही दिखाया है।


स्वास्थ्य पर प्रभाव और सुधार की मांग

सांसद अजय माकन ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है, यह कहते हुए कि जनता को वायु प्रदूषण के वास्तविक खतरों से अवगत न कराना लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने CAQM के गैर-सरकारी सदस्यों को पत्र लिखकर मांग की है कि आयोग जनवरी से सितंबर का वास्तविक औसत AQI और मासिक आंकड़े सार्वजनिक करे, 2018 से तुलनात्मक तालिका लागू करे और भ्रामक दावों में सुधार करे।