लाल किला ब्लास्ट मामले में NIA की चार्जशीट में नए खुलासे
मुख्य जानकारी
नई दिल्ली: लाल किला ब्लास्ट की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा प्रस्तुत चार्जशीट में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। एजेंसी का कहना है कि हमले की योजना अचानक नहीं बनी थी, बल्कि इसके लिए लगभग दो वर्षों तक लाल किले और उसके आस-पास के क्षेत्रों की निगरानी की गई थी। चार्जशीट में ओमर उन नबी सहित 13 आरोपियों की कथित भूमिका का उल्लेख किया गया है।
ओमर उन नबी पर NIA का बड़ा आरोप
NIA के अनुसार, लाल किले के पास हुए विस्फोट में इस्तेमाल की गई हुंडई i20 कार को वाहन आधारित विस्फोटक उपकरण (VBIED) में परिवर्तित किया गया था। एजेंसी का दावा है कि घटनास्थल से प्राप्त जैविक नमूनों की DNA जांच में ओमर उन नबी की पहचान हुई। इसी आधार पर NIA ने आरोप लगाया है कि ओमर उस समय कार के अंदर था और उसने कमांड सिस्टम के माध्यम से विस्फोटक को सक्रिय किया। चार्जशीट में इसे आत्मघाती हमला बताया गया है। जांच में 73 नमूने जब्त किए गए, जिनमें TATP, अमोनियम नाइट्रेट और पोटैशियम नाइट्रेट शामिल हैं।
IED, ड्रोन और तकनीकी गतिविधियों का जिक्र
चार्जशीट में आरोपी जसिर बिलाल वानी के खिलाफ भी कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। NIA के अनुसार, उसने अन्य आरोपियों के साथ मुलाकातें कीं और IED से संबंधित गतिविधियों में भाग लिया। एजेंसी का कहना है कि उसने रॉकेट आधारित उपकरण बनाने और उसके परीक्षण से संबंधित ऑनलाइन जानकारी की खोज की थी। चार्जशीट में जंगलों में परीक्षण और संबंधित सामग्री की बरामदगी का भी उल्लेख है। इसके अलावा, ओमर उन नबी द्वारा जसिर को दो ड्रोन देने और ड्रोन से जुड़े परीक्षणों का भी जिक्र किया गया है।
कट्टरपंथी सामग्री और 'गजवा-ए-हिंद' का उल्लेख
NIA ने अपनी चार्जशीट में कट्टरपंथी साहित्य और प्रचार सामग्री का भी उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार, आरोपियों से जुड़ी सामग्री में हथियारों, निगरानी, गुप्त गतिविधियों और IED से संबंधित जानकारी शामिल थी। चार्जशीट में 'Ghazwa-e-Hind' जैसी विचारधारा का भी जिक्र है, जिसे एजेंसी हिंसा और सशस्त्र संघर्ष को बढ़ावा देने वाली मानती है। कुछ हस्तलिखित नोट्स में लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्वीकार करने और शरिया कानून लागू करने की बातें भी सामने आई हैं।
लाल किले की रेकी का दावा
चार्जशीट के अनुसार, लाल किले को निशाना बनाने की योजना दिसंबर 2023 से शुरू हुई थी, और आरोपियों ने लगभग दो वर्षों तक इस ऐतिहासिक स्थल और उसके आस-पास के क्षेत्रों का अवलोकन किया। NIA का कहना है कि कुछ संदिग्धों की श्रीनगर में गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को पकड़े जाने का डर बढ़ गया, जिसके चलते ओमर उन नबी ने कथित तौर पर हमले को पहले ही अंजाम देने का निर्णय लिया।
एजेंसी ने अपने मामले में बरामद सामग्री, विस्फोटक गतिविधियों से जुड़े सबूत और फॉरेंसिक व जैविक साक्ष्यों को महत्वपूर्ण आधार बताया है। चार्जशीट में उल्लेख है कि धमाके में 11 लोगों की जान गई और 29 लोग घायल हुए। ओमर उन नबी की भी धमाके में मौत हो गई थी। NIA के सभी दावे न्यायिक प्रक्रिया के तहत जांचे जाएंगे।
