इंदौर: कचरा प्रबंधन में सफलता का अनूठा उदाहरण
इंदौर का कचरा प्रबंधन मॉडल
भारत के कई शहर आज भी कचरे की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश का इंदौर इस चुनौती को अवसर में बदलने का एक सफल उदाहरण प्रस्तुत करता है। स्वच्छता और प्रभावी कचरा प्रबंधन की नीतियों ने शहर को नई पहचान दी है। नगर निगम अब केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि कचरे से आय भी उत्पन्न कर रहा है। यही मॉडल इंदौर को लगातार देश के सबसे स्वच्छ शहरों में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
कचरे को आय का स्रोत बनाना
इंदौर नगर निगम ने गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र करने की प्रणाली लागू की है। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निष्पादन शुरू किया गया। इस प्रक्रिया में निजी कंपनियों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है, जिससे कचरे का बेहतर उपयोग संभव हो सका और नगर निगम के लिए नई आय के रास्ते खुल गए।
जैविक खाद की बढ़ती मांग
गीले कचरे से तैयार जैविक खाद की किसानों के बीच अच्छी मांग है। नगर निगम इस खाद का उत्पादन कर उसे उपलब्ध करा रहा है। बढ़ती मांग के कारण उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इस व्यवस्था से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी मिल रहा है।
PPP मॉडल से हो रही कमाई
नगर निगम ने कचरा प्रबंधन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल अपनाया है। निगम ने निजी कंपनी को जमीन उपलब्ध कराई है, जबकि मशीनें और प्रसंस्करण की जिम्मेदारी कंपनी ने संभाली है। इसके बदले में कंपनी हर वर्ष नगर निगम को लाखों रुपये का भुगतान करती है, जिससे राजस्व में लगातार वृद्धि हो रही है।
बायो सीएनजी से बढ़ी आमदनी
चोइथराम मंडी से निकलने वाले जैविक कचरे का उपयोग बायो सीएनजी बनाने में किया जा रहा है। इस परियोजना से नगर निगम को हर वर्ष लगभग एक करोड़ रुपये की आय होती है। विभिन्न परियोजनाओं से होने वाली कुल कमाई चार करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है।
देश के लिए प्रेरणादायक मॉडल
इंदौर की सफलता केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है। शहर ने यह साबित किया है कि सही योजना, आधुनिक तकनीक और लोगों की भागीदारी से कचरे जैसी बड़ी समस्या को संसाधन में बदला जा सकता है। यही कारण है कि इंदौर का मॉडल अब अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है।
