मध्य प्रदेश भाजपा की कार्यसमिति की बैठक: युवा और अनुसूचित जाति पर ध्यान केंद्रित
धार्मिक नगरी में भाजपा की महत्वपूर्ण बैठक
मध्य प्रदेश भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक रविवार को ओरछा में आरंभ होने जा रही है। यह बैठक श्रीराम राजा की नगरी में आयोजित की जा रही है और इसे पार्टी के लिए कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक में लगभग 350 से 400 नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। इस दौरान पार्टी के भविष्य के कार्यक्रमों और राजनीतिक रणनीतियों का खाका तैयार किया जाएगा।
बैठक का कार्यक्रम
बैठक का आरंभ रविवार सुबह लगभग नौ बजे होगा, जिसमें विभिन्न सत्रों में चर्चा की जाएगी। यह बैठक 31 अगस्त को दोपहर करीब 12 बजे समाप्त होगी। प्रदेश कार्यसमिति में संगठन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ-साथ सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने और आगामी राजनीतिक गतिविधियों पर भी चर्चा की जाएगी।
युवाओं को जोड़ने की योजना
बैठक में विशेष रूप से युवा वर्ग, खासकर जेन जी, तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए घर-घर संपर्क अभियान चलाने और युवाओं के साथ सीधे संवाद स्थापित करने की रणनीति पर विचार किया जाएगा। पार्टी का उद्देश्य नई पीढ़ी को संगठन और सरकार की योजनाओं से जोड़ना है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से प्रदेश में सेवा संकल्प अभियान शुरू करने का प्रस्ताव भी चर्चा में रहेगा।
अनुसूचित जाति वर्ग पर ध्यान
भाजपा की रणनीति में अनुसूचित जाति वर्ग के बीच पार्टी की पकड़ को मजबूत करना भी एक प्रमुख मुद्दा रहेगा। प्रदेश कार्यसमिति में इस वर्ग तक संगठन की पहुंच बढ़ाने और केंद्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर विचार किया जाएगा। पार्टी का ध्यान समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनके लाभ पहुंचाने पर भी रहेगा। इसके लिए संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा की जाएगी।
बैठक में शामिल होने वाले नेता
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय मंत्री, राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेश पदाधिकारी, कोर समिति के सदस्य, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी, संभाग प्रभारी और विभिन्न मोर्चों के अध्यक्ष शामिल होंगे। इस बैठक में 106 नियमित सदस्यों को स्थान दिया गया है, साथ ही 41 विशेष आमंत्रित सदस्य भी बनाए गए हैं। नियमित और विशेष आमंत्रित सदस्यों की कुल संख्या लगभग 150 है। सांसदों, विधायकों और अन्य पदेन सदस्यों को जोड़ने के बाद बैठक में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या लगभग 350 से 400 तक पहुंच सकती है।
