मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन: भोपाल में बढ़ती मांगें और सुरक्षा व्यवस्था
किसानों का बढ़ता आंदोलन
मध्य प्रदेश में किसानों का प्रदर्शन तेजी से बढ़ रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के तहत 2,000 से अधिक किसान नर्मदापुरम से मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे हैं। रास्ते में कई स्थानों पर पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए, लेकिन प्रदर्शनकारी उन्हें पार कर राजधानी के बाहरी इलाके में पहुंचने में सफल रहे। किसान अपने साथ कपड़े, बिस्तर और कई दिनों का राशन लेकर आए हैं। फिलहाल, उन्होंने भोपाल में डेरा डाल रखा है और मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास की ओर मार्च की योजना बना रहे हैं।
किसानों की मुख्य मांगें
प्रदर्शन कर रहे किसानों की प्रमुख मांग है कि राज्य में मूंग की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 100 प्रतिशत पर सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था के तहत सीमित मात्रा में ही खरीद होती है, जिससे उन्हें अपनी उपज को खुले बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ता है। इसके अलावा, किसान ई-टोकन प्रणाली में बदलाव या उसे समाप्त करने और उचित दरों पर समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने की भी मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था से उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।
सरकार के साथ बातचीत का पहला दौर
भोपाल पहुंचने के बाद किसानों और राज्य सरकार के बीच पहली बातचीत हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद सरकार ने वार्ता के लिए एक मंत्रिस्तरीय समिति का गठन किया है। कृषि मंत्री ने केंद्र सरकार से मूंग खरीद का लक्ष्य बढ़ाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि इस वर्ष प्रदेश में मूंग का उत्पादन अनुमान से अधिक हुआ है, इसलिए खरीद सीमा बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि अधिक किसानों को एमएसपी का लाभ मिल सके।
युवाओं का समर्थन
किसानों के आंदोलन को कुछ युवा और जेन-ज़ेड समर्थकों का भी समर्थन मिलने लगा है। प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे युवाओं ने किसानों के साथ एकजुटता दिखाई। इसके अलावा, किसान संगठनों और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक समूहों के बीच एक साझा मंच बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई है, जिससे आंदोलन को और व्यापक स्वरूप मिलने की संभावना बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था
किसानों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। मुख्यमंत्री आवास की ओर प्रस्तावित मार्च को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है। प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल, बैरिकेड्स, त्वरित कार्रवाई बल (RAF) और अन्य सुरक्षा संसाधन तैनात किए गए हैं। सरकार वार्ता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, जबकि किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
