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अमृतसरी कुलचे को मिलेगा जीआई टैग, पहचान को मिलेगी नई मजबूती

अमृतसर का प्रसिद्ध अमृतसरी कुलचा अब जीआई टैग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। हाल ही में हुई बैठक में अधिकारियों और व्यापारियों ने इस पहल की चर्चा की, जिसका उद्देश्य कुलचे की असली पहचान को सुरक्षित करना है। जीआई टैग मिलने से न केवल असली और नकली उत्पादों के बीच अंतर करना आसान होगा, बल्कि यह अमृतसर की सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती प्रदान करेगा। व्यापारियों ने इस प्रयास को सकारात्मक बताया है और इसके लिए आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
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अमृतसरी कुलचे को मिलेगा जीआई टैग, पहचान को मिलेगी नई मजबूती

अमृतसरी कुलचे की नई कानूनी पहचान


अमृतसर का प्रसिद्ध अमृतसरी कुलचा अब एक नई कानूनी पहचान की ओर बढ़ रहा है। डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में अधिकारियों, विशेषज्ञों और कुलचा व्यापार से जुड़े लोगों ने भाग लिया। इस पहल का उद्देश्य अमृतसरी कुलचे की असली पहचान को सुरक्षित करना है।


जीआई टैग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

बैठक की अध्यक्षता पंजाब सरकार के फूड प्रोसेसिंग विभाग के विशेष सचिव संदीप हंस ने की। इस बैठक में शहर के प्रमुख कुलचा निर्माताओं और व्यापारियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने बताया कि अमृतसरी कुलचा केवल एक लोकप्रिय व्यंजन नहीं है, बल्कि यह शहर की संस्कृति और खान-पान की विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए, इसे जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग दिलाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। व्यापारियों ने इस प्रयास को सकारात्मक बताते हुए कहा कि इससे अमृतसर की पहचान को और मजबूती मिलेगी।


नकली उत्पादों पर नियंत्रण

बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जीआई टैग मिलने के बाद अमृतसरी कुलचे को एक विशेष कानूनी पहचान प्राप्त होगी। इससे बाजार में असली और नकली उत्पादों के बीच अंतर करना आसान होगा। अधिकारियों का कहना है कि कई स्थानों पर अमृतसरी कुलचे के नाम पर अन्य उत्पाद बेचे जा रहे हैं, जिससे इसकी असली पहचान प्रभावित हो रही है। जीआई टैग मिलने के बाद ऐसे मामलों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी, जिससे ग्राहकों को असली स्वाद मिलेगा और कुलचा बनाने वाले कारीगरों तथा व्यापारियों के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे।


व्यापारियों का उत्साह

बैठक में पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी और गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ भी शामिल हुए। उन्होंने सुझाव दिया कि कुलचा निर्माताओं की एक एसोसिएशन बनाई जाए, जो जीआई टैग के लिए आधिकारिक आवेदन कर सके। व्यापारियों ने कहा कि पहली बार उनके पारंपरिक कारोबार को इस स्तर पर महत्व दिया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि जीआई टैग के लिए आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।