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चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में बदलाव: प्रशासन ने शुरू की सुनवाई प्रक्रिया

चंडीगढ़ का 75 साल पुराना मास्टर प्लान अब लोगों की आवश्यकताओं के अनुसार अपडेट किया जा रहा है। प्रशासन ने एक स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया है, जो चार दिनों तक लोगों की आपत्तियों और सुझावों को सुनेगी। इस दौरान आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और पेरिफेरी क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा होगी। स्थानीय सांसद मनीष तिवारी ने सुझावों के लिए निर्धारित समय सीमा को कम बताया है। जानें इस प्रक्रिया में जनता की चिंताएं और सुझाव क्या हैं।
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चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में बदलाव: प्रशासन ने शुरू की सुनवाई प्रक्रिया

चंडीगढ़ का मास्टर प्लान अपडेट किया जा रहा है

चंडीगढ़ का 75 साल पुराना मास्टर प्लान अब स्थानीय निवासियों की बदलती आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देने से पहले, प्रशासन ने एक स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया है, जो सेक्टर-6 स्थित यूटी गेस्ट हाउस में लोगों की आपत्तियों और सुझावों को सुनेगी। यह प्रक्रिया चार दिनों तक चलेगी।


सुनवाई का कार्यक्रम

चार दिन की सुनवाई का शेड्यूल

प्रशासन ने विभिन्न विषयों के लिए अलग-अलग दिन निर्धारित किए हैं ताकि किसी को भी कठिनाई न हो। 25 जून को आवासीय और वाणिज्यिक मामलों पर चर्चा होगी, जबकि 26 जून को औद्योगिक और सार्वजनिक क्षेत्रों से संबंधित सुझावों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद 27 जून को पेरिफेरी क्षेत्रों से जुड़े आवेदनों की सुनवाई होगी। जो लोग अपने निर्धारित दिन पर उपस्थित नहीं हो पाएंगे, उन्हें 28 जून को अंतिम अवसर दिया जाएगा। हर दिन की सुनवाई सुबह 10:30 बजे से 1:30 बजे तक और फिर 3 बजे से 5 बजे तक होगी.


लोगों की चिंताएं और सुझाव

जनता की चिंताएं और सुझाव

मास्टर प्लान में संशोधन के लिए अब तक सौ से अधिक सुझाव प्रशासन को प्राप्त हो चुके हैं। हेरिटेज विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों ने इमारतों की ऊंचाई को तीस मीटर तक बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि सीवरेज, पानी और स्कूलों की क्षमता बढ़ाए बिना जनसंख्या का दबाव बढ़ाना उचित नहीं होगा। लोगों ने पार्किंग और अग्नि सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। वहीं, व्यापारिक संगठनों ने औद्योगिक प्लॉट और मिश्रित भूमि उपयोग बढ़ाने के निर्णय का स्वागत किया है.


सांसद ने उठाए महत्वपूर्ण सवाल

सांसद ने उठाए सवाल

सुनवाई की प्रक्रिया के दौरान, स्थानीय सांसद मनीष तिवारी ने कुछ महत्वपूर्ण सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए निर्धारित इक्कीस दिन की समय सीमा बहुत कम है। उनका मानना है कि इतने बड़े और दीर्घकालिक प्रभाव वाले प्रस्तावों पर सही तरीके से चर्चा और समीक्षा करने के लिए लोगों को अधिक समय मिलना चाहिए.