डॉ. गुरप्रीत कौर ने मानहानि मामले में कानूनी कार्रवाई की
मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी ने उठाया कदम
चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी, डॉ. गुरप्रीत कौर, ने अपने खिलाफ लगाए गए रिश्वत के आरोपों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, उन्होंने मजीठिया, कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा और रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। आरोपों में कहा गया है कि उन्होंने एक दुष्कर्म मामले में आरोपी को बचाने के लिए 5 करोड़ रुपये की मांग की थी। डॉ. कौर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
आरोपों का खंडन
डॉ. गुरप्रीत कौर ने आरोपों को निराधार और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है। अदालत में दायर याचिका में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ गंभीर आरोप फैलाए गए हैं। प्रारंभिक सुनवाई में अदालत ने टिप्पणी की कि प्रस्तुत सामग्री अभी तक अपुष्ट प्रतीत होती है, लेकिन अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई के बाद लिया जाएगा।
मजीठिया और खैरा पर आरोप
मामले में यह भी बताया गया कि बिक्रम सिंह मजीठिया ने 1 सितंबर को चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. गुरप्रीत कौर से जुड़े आरोपों को सार्वजनिक किया था। इसके बाद यह सामग्री सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई। सुखपाल सिंह खैरा के बयान भी अदालत में दर्ज किए गए हैं। डॉ. कौर का कहना है कि इन बयानों ने उनकी सामाजिक और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है।
अदालत का आदेश
9 सितंबर को चंडीगढ़ जिला अदालत ने मजीठिया, खैरा और रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह को डॉ. गुरप्रीत कौर के खिलाफ अपुष्ट मानहानिकारक सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण से अगले आदेश तक रोक दिया। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा उसकी गरिमा का हिस्सा होती है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ इसका संतुलन आवश्यक है। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
हरसिमरत बादल की भूमिका
इस विवाद में हरसिमरत कौर बादल की भूमिका अलग कानूनी कार्रवाई के रूप में सामने आई है। उन्होंने 8 सितंबर को राष्ट्रीय महिला आयोग का रुख किया और डॉ. गुरप्रीत कौर के खिलाफ लगाए गए 5 करोड़ रुपये के आरोपों की जांच और CBI जांच की मांग की। डॉ. गुरप्रीत कौर ने इन आरोपों को निराधार बताया है। इसलिए हरसिमरत को मौजूदा मानहानि मामले में आरोपी पक्षकार बताना उपलब्ध रिपोर्टों से पुष्ट नहीं होता।
30 सितंबर की सुनवाई पर नजर
अदालत के अंतरिम आदेश के बाद, मामले का अगला महत्वपूर्ण चरण 30 सितंबर को होने वाली सुनवाई होगी। इस दौरान संबंधित पक्षों को अपने तर्क प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। फिलहाल, अदालत ने सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर अपुष्ट मानहानिकारक सामग्री के प्रसार पर रोक लगाई है, लेकिन पहले से मौजूद पोस्ट और वीडियो हटाने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। अदालत ने इस पहलू पर प्रतिवादियों को सुनने की आवश्यकता बताई है।
