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पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी विवाद: भूपेश बघेल की कोशिशें बेकार

पंजाब कांग्रेस में चल रहे अंदरूनी विवाद को सुलझाने के लिए भूपेश बघेल की कोशिशें अब तक सफल नहीं हो पाई हैं। चंडीगढ़ में आयोजित बैठकों में नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। बघेल की वापसी के बाद भी राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं, जिसमें सुखजिंदर रंधावा की अमित शाह से मुलाकात भी शामिल है। क्या पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन होगा? जानिए पूरी कहानी।
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चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस का संकट


चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में चल रहे लंबे समय से विवाद को सुलझाने की कोशिशें फिलहाल सफल नहीं हो रही हैं। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर, कांग्रेस नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चंडीगढ़ भेजा था। उनका उद्देश्य प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों के बीच मतभेदों को कम करना था। हालांकि, कई दौर की बातचीत के बावजूद राजनीतिक दूरी बनी हुई है।


भूपेश बघेल की बैठकें

भूपेश बघेल ने चंडीगढ़ पहुंचने के बाद लगभग 92 नेताओं के साथ अलग-अलग और सामूहिक बैठकें कीं। इस दौरान उन्होंने सभी पक्षों की राय सुनी और संगठन में एकजुटता लाने का प्रयास किया। लेकिन बातचीत के बावजूद कोई साझा सहमति नहीं बन सकी। अंततः बघेल ने स्पष्ट किया कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ही पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे।


चन्नी गुट की मांगें

चन्नी गुट अपनी मांग पर कायम


बैठकों में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग दोहराई। बैठक के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि कुछ नेताओं ने अपने सुझाव और चिंताएं रखी हैं, जिन्हें कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व का होगा और सभी नेताओं को उचित प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया जाएगा।


बघेल की वापसी और सियासी चर्चाएं

बघेल की वापसी के बाद बढ़ी सियासी चर्चा


पांच दिन का दौरा पूरा कर भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ लौट गए, लेकिन पंजाब कांग्रेस के भीतर का विवाद जस का तस बना हुआ है। बघेल के जाने के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने फिर से कहा कि चुनाव जीतने के लिए पार्टी को मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि समय के अनुसार राजनीतिक दलों को अपने फैसले बदलने पड़ते हैं और संगठन को भी परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।


राजा वडिंग का पलटवार

राजा वडिंग का पलटवार


रंधावा के बयान के बाद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि वह समझौतावादी होते तो रंधावा इतने वर्षों तक उनके साथ काम नहीं करते। वडिंग ने यह भी कहा कि कांग्रेस में समझौतावादी नेताओं और स्लीपर सेल के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए संकेत दिया कि बीजेपी नेताओं से करीबी रखने वालों के लिए पार्टी में जगह नहीं होनी चाहिए।


सुखजिंदर रंधावा की अमित शाह से मुलाकात

अमित शाह से मुलाकात भी बनी चर्चा


हाल के दिनों में सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी रही। रंधावा ने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात केवल पंजाब की कानून-व्यवस्था, सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते नार्को-टेरर और गैंगस्टर गतिविधियों जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए थी। हालांकि, कांग्रेस के अंदर जारी खींचतान के बीच इस मुलाकात को लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं।