Newzfatafatlogo

पंजाब की राजनीति में नया विवाद: मजीठिया पर कानूनी नोटिस

पंजाब की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन ने बिक्रम सिंह मजीठिया को कानूनी नोटिस भेजा। मजीठिया पर गंभीर आरोप लगाने के बाद घुम्मन ने उनसे सोशल मीडिया पर पोस्ट हटाने और माफी मांगने की मांग की है। इस मामले ने पंजाब की सियासत में हलचल मचा दी है, और घुम्मन ने मजीठिया के आरोपों का खंडन किया है। क्या मजीठिया इन मांगों का पालन करेंगे? जानिए पूरी कहानी।
 | 

कानूनी मोड़ पर पहुंची पंजाब की सियासत


पंजाब की राजनीतिक स्थिति में आरोपों का दौर अब एक कानूनी विवाद में बदल गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD, राजबीर सिंह घुम्मन ने बिक्रम सिंह मजीठिया को कानूनी नोटिस भेजा है, जिसमें उनसे उनके आरोपों का स्पष्टीकरण मांगा गया है। घुम्मन ने मजीठिया से सोशल मीडिया पर पोस्ट हटाने, माफी मांगने और भविष्य में ऐसे आरोप न लगाने की लिखित गारंटी देने की मांग की है।


मजीठिया के आरोपों का खंडन

मजीठिया ने सोशल मीडिया पर एक कथित ईडी पत्र साझा करते हुए घुम्मन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि घुम्मन कुछ बिचौलियों के साथ मिलकर अधिकारियों के तबादले, हथियारों के लाइसेंस और सरकारी मंजूरियों के लिए एक कथित सिंडिकेट चला रहे हैं। मजीठिया ने इस मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान की भूमिका पर भी सवाल उठाए। घुम्मन ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि यदि मजीठिया के पास वॉट्सऐप चैट या पैसों के लेनदेन का कोई ठोस सबूत है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए।


24 घंटे में सामग्री हटाने की मांग

कानूनी नोटिस में घुम्मन ने मजीठिया से सोशल मीडिया पर किए गए आरोपों से संबंधित सभी सामग्री, जैसे पोस्ट और वीडियो, 24 घंटे के भीतर हटाने की मांग की है। इसके साथ ही, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और भविष्य में ऐसे आरोप न लगाने की लिखित गारंटी देने की भी मांग की गई है। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि समय सीमा के भीतर ये मांगें पूरी नहीं की गईं, तो मजीठिया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला पंजाब की राजनीति में एक नया विवाद उत्पन्न कर रहा है।


तबादलों पर घुम्मन का स्पष्टीकरण

घुम्मन ने सरकारी अधिकारियों की नियुक्तियों और तबादलों से जुड़े आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि OSD के रूप में विधायकों और अधिकारियों से मिलने वाले अनुरोधों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन तबादलों का अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री का होता है। दूसरी ओर, अकाली दल और भाजपा ने इस पूरे मामले की केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग की है। आम आदमी पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश बताया है।