पंजाब पुलिस ने ड्रोन तस्करी रोकने के लिए एआई आधारित प्रणाली 'बाज आंख' लागू की
पंजाब में ड्रोन तस्करी पर नकेल
नई दिल्ली: पंजाब पुलिस ने पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से नशे और हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए एक नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एंटी ड्रोन प्रणाली, जिसे 'बाज आंख' कहा जाता है, को लागू किया है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य संदिग्ध ड्रोन की पहचान करना और उन्हें समय पर निष्क्रिय करना है। पुलिस का कहना है कि यह प्रणाली सीमा सुरक्षा बल की मौजूदा सुरक्षा उपायों के साथ मिलकर कार्य करेगी।
बाज आंख प्रणाली की विशेषताएँ
'बाज आंख' एक वाहन पर स्थापित एआई आधारित एंटी ड्रोन प्रणाली है, जिसमें अत्याधुनिक सेंसर लगे हुए हैं जो 8 से 10 किलोमीटर की दूरी पर उड़ रहे ड्रोन का पता लगाने में सक्षम हैं। यह प्रणाली ड्रोन और उड़ते पक्षियों के बीच अंतर पहचानने की क्षमता रखती है, जिससे गलत अलर्ट की संभावना कम हो जाती है। जब ड्रोन की पहचान होती है, तो उसकी स्थिति, गति और ऊंचाई की जानकारी तुरंत ऑपरेटर की स्क्रीन पर प्रदर्शित होती है।
हवाई नाका रणनीति
पंजाब पुलिस ने आसमान के माध्यम से होने वाली तस्करी को रोकने के लिए 'हवाई नाका' रणनीति विकसित की है। इसके अंतर्गत तीन एंटी ड्रोन सिस्टम तैनात किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए अब केवल सीमा पार घुसपैठ ही नहीं, बल्कि ड्रोन के जरिए भेजे जा रहे नशीले पदार्थों और हथियारों की खेप को रोकना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। नई तकनीक इसी चुनौती का सामना करने के लिए बनाई गई है।
प्रणाली की कार्यप्रणाली
यह प्रणाली केवल ड्रोन की पहचान नहीं करती, बल्कि उसे निष्क्रिय करने की क्षमता भी रखती है। जब ड्रोन दिखाई देता है, तो 'बाज आंख' उसके रेडियो और जीपीएस सिग्नल को बाधित कर देती है। इसके परिणामस्वरूप, ड्रोन या तो नीचे उतर जाता है, दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है, या अपनी दिशा में लौटने के लिए मजबूर हो जाता है। इससे सुरक्षा एजेंसियों को त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
पंजाब पुलिस के आंकड़े
पंजाब पुलिस के अनुसार, 2025 से 27 जुलाई 2026 तक सुरक्षा एजेंसियों ने पंजाब सीमा पर 474 ड्रोन बरामद किए हैं और 777.474 किलोग्राम हेरोइन जब्त की है। 2025 में 313 ड्रोन और 385.119 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। वहीं, 2026 के पहले सात महीनों में 161 ड्रोन पकड़े गए और 392.355 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई है। पाकिस्तान से लगी पंजाब की 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इस नई तकनीक से निगरानी और सुरक्षा में सुधार की उम्मीद है।
