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पंजाब में अस्पतालों के लिए नई दिशा-निर्देश: शव रोकने पर लगी रोक

पंजाब सरकार ने मरीजों और उनके परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब अस्पतालों को इलाज का बकाया बिल न होने के कारण शव रोकने की अनुमति नहीं होगी। पंजाब मानवाधिकार आयोग ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं और अस्पतालों में सूचना बोर्ड लगाने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके अलावा, लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए हेल्पलाइन भी उपलब्ध कराई गई है। जानें इस पहल के बारे में और अधिक जानकारी।
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पंजाब में मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा


चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने मरीजों और उनके परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब किसी भी अस्पताल को इलाज का बकाया बिल न होने के कारण शव को रोकने की अनुमति नहीं होगी। पंजाब मानवाधिकार आयोग ने इस संबंध में जारी सरकारी अधिसूचना का पालन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, अस्पतालों में सूचना बोर्ड लगाने और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।


मानवाधिकार आयोग की पहल

पंजाब मानवाधिकार आयोग के सदस्य पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी ने बताया कि सरकार ने इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को आदेश दिया कि इस आदेश का पालन हर स्तर पर सख्ती से किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में शव को बकाया बिल के कारण नहीं रोका जा सकता।


जन-संवाद कार्यक्रम में चर्चा

अमलोह और मंडी गोबिंदगढ़ की देश भगत यूनिवर्सिटी तथा रिमट यूनिवर्सिटी में आयोजित जन-संवाद कार्यक्रम के दौरान शंटी ने लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने अतिरिक्त उपायुक्त (विकास) सुरिंदर सिंह धालीवाल को अधिसूचना की प्रति सौंपते हुए कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस पर कोई समझौता नहीं होगा।


अस्पतालों में सूचना बोर्ड की स्थापना

आयोग ने निर्देश दिया है कि सभी सरकारी और निजी अस्पताल अपने मुख्य प्रवेश द्वार पर सूचना बोर्ड लगाएं। इस बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा जाएगा कि इलाज का बिल बकाया होने पर भी मरीज का शव उसके परिजनों को सौंपा जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना और उत्पीड़न को रोकना है।


शिकायत के लिए हेल्पलाइन

जतिंदर सिंह शंटी ने लोगों से अपील की कि यदि उनके मौलिक या कानूनी अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वे बिना किसी संकोच के मानवाधिकार आयोग से संपर्क करें। उन्होंने बताया कि आयोग के व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 9855475547 पर सबूतों के साथ शिकायत भेजी जा सकती है। आयोग को प्रतिदिन लगभग 500 शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, जिनका प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जा रहा है।


पारदर्शिता और जागरूकता पर जोर

आयोग ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे हर शिकायत का संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ समाधान करें। कार्यक्रम के दौरान 'नशों के विरुद्ध युद्ध' अभियान के तहत विद्यार्थियों को जागरूक करने वाले पोस्टर भी जारी किए गए। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य भी उपस्थित रहे।